
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने एसईसीएल के छह कर्मचारियों के मामले को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है वह आवेदको की ओर से दिये जाने वाले नये प्रतिवेदन पर 60 दिनों के भीतर उचित निर्णय ले।
यह मामला धनपुरी शहडोल के याचिकाकर्ताओं राजनीश कांत खरे, राकेश कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार गौतम, शरद गुप्ता, राजेश कुमार चंद्रवंशी और नीरज कच्छ की ओर से दायर किया गया था। जिसमें उन्होंने अपनी सेवा संबंधी गोपनीय रिपोर्ट में अवांछनीय ग्रेडिंग को चुनौती दी थी और वर्ष 2023-24 की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) के पुनर्मूल्यांकन कर पदोन्नति की मांग की है। आवेदकों की ओर से कहा गया वे सभी एसईसीएल की सोहागपुर क्षेत्र की डामिनी यूजी खदान में माइनिंग सरदार और ओवरमैन के पद पर कार्यरत हैं। उनका सेवा रिकॉर्ड अच्छा रहा है और उनकी उपस्थिति भी उत्कृष्ट रही है। याचिकाकर्ता राजनीश कांत खरे को वर्ष 2023-24 का सर्वश्रेष्ठ माइनिंग सरदार पुरस्कार भी मिला था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें और डामिनी यूजी खदान के लगभग 80 फीसदी कर्मचारियों को वर्ष 2023-24 के लिए मनमाने ढंग से औसत ग्रेडिंग दी गई। यह ग्रेडिंग उनके वास्तविक प्रदर्शन के विपरीत है और इससे उनकी पदोन्नति अवरुद्ध हो गई है। जिसकों लेकर कई बार आवेदन दिये, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आवेदकों की ओर से कहा गया कि एसीआर ग्रेडिंग मनमानी और असंवैधानिक है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने से पूर्व याचिकाकर्ताओं को कोई सूचना नहीं दी गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उत्कृष्ट सेवा काल और पुरस्कार के बावजूद औसत ग्रेडिंग देना पूर्वाग्रहपूर्ण है। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी, पंकज तिवारी, विनीत टेहेनगुनिया, शुभम पाटकर ने पैरवी की।
