जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने परिवीक्षा अवधि में पहले वर्ष 70, दूसरे वर्ष 80 और तीसरे वर्ष 90 प्रतिशत वेतन देने के नियम को चुनौती के मामले में जवाब-तलब किया है। मामले में राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता आनंद कुमार मिश्रा सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि समान कार्य के लिए समान वेतनमान मिलना चाहिए। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग के जो शिक्षक परिवीक्षा अवधि में हैं, उनकी नियुक्ति नियमित शिक्षकों की भांति हुई है। जिस कारण परिवीक्षा अवधि में नियमित शिक्षकों की भांति शत-प्रतिशत वेतन न दिया जाना अनुचित है। 2019 में लागू की गई परिवीक्षा अवधि में वेतन कटौती संबंधी व्यवस्था असंवैधानिक होने के कारण निरस्त करने योग्य है।
इस नियम से प्रभावित 1070 शिक्षक 2018 में विज्ञपित भर्ती के माध्यम से चयनित होकर विभिन्न जिलों में नियुक्त हैं। विज्ञापन 2018 में जारी हुआ था। परिणाम जारी होने के बाद 2019 में सरकार ने बीच भर्ती में परिवीक्षा अवधि तीन साल करते हुए पहले साल वेतन का 70 प्रतिशत, दूसरे साल 80 प्रतिशत और तीसरे साल 90 प्रतिशत देने का नियम बना दिया। संबंधित शिक्षकों को इन्हीं नए नियमों के अंतर्गत वेतन दिया गया है, जो कि सर्वथा अनुचित है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने सरकार से जवाब तलब किया है।
