लंदन, 09 फरवरी (वार्ता) ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के शीर्ष सहयोगी और चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
यह इस्तीफा ‘एपस्टीन फाइल्स’ के एक और बैच के जारी होने के बाद आया है, जिनमें अमेरिका में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन का कई बार उल्लेख किया गया है।
रविवार को जारी एक बयान में, श्री मैकस्वीनी ने व्यक्तिगत रूप से श्री मैंडेलसन की नियुक्ति की सिफारिश करने पर खेद जताते हुए अपने इस्तीफे की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी की शानदार जीत की रणनीति बनाने का श्रेय श्री मैकस्वीनी को दिया जाता है।
श्री मैकस्वीनी ने कहा, “गहन विचार-विमर्श के बाद, मैंने सरकार से इस्तीफा देने का फैसला किया है। पीटर मैंडेलसन को नियुक्त करने का निर्णय गलत था। उन्होंने हमारी पार्टी, हमारे देश और स्वयं राजनीति में विश्वास को नुकसान पहुँचाया है।”
चीफ ऑफ स्टाफ ने कहा, “जब मुझसे पूछा गया, तो मैंने प्रधानमंत्री को वह नियुक्ति करने की सलाह दी थी और मैं उस सलाह की पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ।”
श्री मैंडेलसन को पिछले साल सितंबर में बर्खास्त कर दिया गया था, जब एपस्टीन फाइल्स के एक हिस्से से ईमेल सामने आए थे। इन ईमेल में यौन अपराधों के कई आरोपों का सामना कर रहे एपस्टीन के साथ उनके संपर्क और समर्थन को उजागर किया गया था।
इसके अलावा, इस सप्ताह की शुरुआत में जारी नवीनतम बैच से पता चला है कि इस पूर्व सांसद के 2008 में दोषसिद्धि के बाद भी जेफरी एपिस्टीन के साथ संबंध बने रहे। इसके कारण यूके लेबर पार्टी के भीतर उन्हें इतनी महत्वपूर्ण भूमिका सौंपने के लिए गुस्से में भरी नई मांगें उठने लगीं।
श्री स्टारमर के अनुसार, राजदूत की भूमिका की जांच के दौरान श्री मैंडेलसन के एपस्टीन के साथ संबंधों को चिन्हित किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्व कैबिनेट मंत्री ने अपने संबंधों की गहराई के बारे में उन्हें गुमराह किया था, हालांकि यह स्पष्टीकरण विवाद के बाद पैदा हुई अराजक स्थिति को शांत करने में विफल रहा।
श्री स्टारमर ने अपने पूर्व सहयोगी का इस्तीफा स्वीकार करते हुए, श्री मैकस्वीनी को उनके काम के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि ‘हमारी पार्टी और मैं उनके आभारी हैं।’
श्री स्टारमर ने श्री मैंडेलसन का जिक्र नहीं किया, हालांकि इस कदम ने स्टारमर की सत्ता पर पकड़ को और कमजोर कर दिया है। वह वर्तमान में यूके के सबसे अलोकप्रिय नेताओं में से एक बनते जा रहे हैं, क्योंकि उनकी पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ओर गुस्सा बढ़ रहा है। कई सांसदों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी शुरू कर दी है।
