
ग्वालियर। यूजीसी एक्ट 2026 को लागू करने और 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर पिछड़ा वर्ग सडक़ों पर उतर आया है। आंदोलित हुए इस वर्ग ने इन मांगों को लेकर तहसीलदार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। भितरवार नगर के दाऊ धाम प्रांगण में पिछड़ा वर्ग के सैकड़ों लोग एकत्रित हुए जहां से नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने यूजीसी एक्ट के समर्थन में उसे लागू करने और लंबित 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर तहसीलदार धीरज परिहार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उन्होंने उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग दिल्ली के द्वारा अनुसूचित जाति,जनजाति के अनुसार पिछड़ा वर्ग के उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं पर होने वाले जातिगत भेदभाव के विरुद्ध समानता लाने जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग दिल्ली द्वारा यूजीसी एक्ट 2026 लागू किया गया था। जिसके विरुद्ध असंवैधानिक रूप से असमानता को बनाए रखने की नियति से तथाकथित लोगों के विरोध करने से यूजीसी एक्ट पर रोक लगा दी गई है। जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का हनन होना बताया है। साथ ही बताया कि 1 फरवरी 2026 को संबंधित तथा कथित लोगों के द्वारा भारत बंद करने के प्रयास के दौरान पिछड़ा वर्ग के लोगों के साथ जगह-जगह अभद्र व्यवहार एवं मारपीट की घटनाओं एवं पिछड़ा वर्ग को अनुच्छेद 16(4) की मंशानुसार पर्याप्त प्रतिनिधित्व के स्थान पर स्वीकृत 27 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ना देकर 14 प्रतिशत ही प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है। जो पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ देखा जाए तो घोर अन्याय है। ऐसी स्थिति में पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के प्रति होने वाले भेदभाव को समाप्त करने के लिए यूजीसी एक्ट 2026 को उसी रूप में लागू किया जाए।
