50% से 18% शुल्क: अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान होगा और सस्ता

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुआ बहुप्रतीक्षित ट्रेड समझौता भारतीय व्यापार जगत के लिए राहत और संभावनाओं का नया दरवाज़ा खोलता नजर आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर सीधे 18 प्रतिशत कर देना एक बड़ा आर्थिक संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल निर्यातकों का बोझ कम होगा बल्कि वैश्विक बाजार में भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।

इस समझौते की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं करते हुए कहा कि दोनों देशों ने आपसी व्यापारिक हितों को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है। साथ ही भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को हटाने की बात भी सामने आई है। माना जा रहा है कि ऊर्जा खरीद को लेकर बनी सहमति ने इस डील को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

टैरिफ में इस बड़ी कटौती का सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ेगा जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं। विशेष रूप से:

1. टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग:

भारतीय कपड़ा और रेडीमेड परिधान उद्योग को सबसे त्वरित लाभ मिलने की संभावना है। कम टैरिफ के चलते अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद सस्ते और अधिक आकर्षक बनेंगे।

2. फार्मास्यूटिकल सेक्टर:

भारत पहले से ही जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। शुल्क घटने से दवा निर्यात और बढ़ सकता है, जिससे इस उद्योग में निवेश और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।

3. ऑटो कंपोनेंट्स और इंजीनियरिंग गुड्स:

भारतीय ऑटो पार्ट्स और मशीनरी उपकरण अमेरिका में मांग रखते हैं। लागत कम होने से ऑर्डर बढ़ने की उम्मीद है।

4. आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग:

हालांकि आईटी सेवाएं सीधे टैरिफ से प्रभावित नहीं होतीं, लेकिन हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्यात को इससे मजबूती मिल सकती है।

5. कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग:

मसाले, चाय, कॉफी और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों की अमेरिकी बाजार में पहुंच आसान होगी, जिससे किसानों और एग्री-बेस्ड कंपनियों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

रणनीतिक और कूटनीतिक असर

यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास और आर्थिक साझेदारी के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी निवेश का माहौल बेहतर होगा और भारत की मेक इन इंडिया नीति को भी बल मिलेगा।

कुल मिलाकर, टैरिफ में कमी भारतीय उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा का नया अवसर लेकर आई है। यदि कंपनियां गुणवत्ता, आपूर्ति श्रृंखला और नवाचार पर ध्यान दें तो अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी आने वाले समय में उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकती है।

 

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