“कैपिटल मार्केट्स के नजरिए से देखें तो बजट 2026 का फोकस शॉर्ट-टर्म तेजी से ज़्यादा निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने पर है। फिस्कल डेफिसिट के तय किए गए रास्ते, ₹12.2 लाख करोड़ के कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) की मजबूत प्रतिबद्धता और मैन्युफैक्चरिंग आधारित ग्रोथ पर जोर—ये सभी बातें भारत की कुल आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता को दिखाती हैं। कैपिटल मार्केट्स के लिए यह लंबे समय के निवेश और बेहतर विज़िबिलिटी के लिए अनुकूल माहौल बनाता है।
कुल मिलाकर, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर्स, बायो-फार्मा और स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग पर दिया गया फोकस भारत की निवेश कहानी के लिए सकारात्मक है। इससे निवेश के मौके सिर्फ कुछ चुनिंदा सेक्टर्स तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका दायरा और बढ़ता है। हालांकि कैपिटल मार्केट्स के कुछ सेक्टर्स में लेन-देन की लागत बढ़ने से ट्रेडिंग सेंटिमेंट पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय के निवेशकों के लिए निरंतरता और फिस्कल डिसिप्लिन कहीं ज़्यादा अहम रहेंगे। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में कैपिटल मार्केट्स अच्छी क्वालिटी वाली कंपनियों, मजबूत बैलेंस शीट और भारत की ग्रोथ थीम्स से जुड़े बिज़नेस को ज़्यादा महत्व देंगे।”
