
जबलपुर। मनी लॉर्डिंग के प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा 45 करोड़ की तीन संपत्ति कुर्क की गयी थी। पीएमएल कोर्ट विशेष न्यायालय इरशाद अली ने कुर्क की गयी संपत्ति केनरा बैंक के पक्ष में बहाल करने के आदेश किये थे।
प्रवर्तन निदेशालय ने जांच में पाया था कि था कि सुश्री जगदंबा एएमडब्ल्यू आटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पुष्पेन्द्र सिंह ने अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिये कई वाहन लोन लिये थे और वाहनो की डिलीवरी नहीं की थी। लोन की रकम का उपयोग निजी लाभ तथा बकाया भुगतान करने के लिए किया गया था। आरोपियों के द्वारा लोन के नाम पर 18 करोड़ 32 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया था। ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सुश्री जगदंबा एएमडब्ल्यू आटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के धोखाधडी के तहत प्रकरण निर्देशक पुष्पेन्द्र सिंह तथा केनरा बैंक के अधिकारियों सहित अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया था।
ईडी ने पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के तहत आरोपी पुष्पेंद्र सिंह और अन्य की अचल और चल संपत्ति को अस्थाई रूप से अटैच किया गया था। इसके बाद मार्च 2024 में अभियोजन शिकायत दर्ज होने के बाद विशेष न्यायालय पीएमएलए जबलपुर ने आरोप तय किये थे। विशेष न्यायालय के समक्ष केनरा बैंक ने ईडी द्वारा कुर्क की गयी 45 करोड़ की तीन संपत्ति की बहाली उनके पक्ष में करने आवेदन पेश किया था। विशेष न्यायालय ने कुर्क की गयी सम्पत्ति बैंक के पक्ष में बहाल करने के आदेश 29 जनवरी 2026 को जारी किये थे। ईडी की तरफ से अधिवक्ता विक्रम सिंह, अधिवक्ता चेतना सिंह तथा सोमेश गुप्ता उपस्थित हुए।
