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अशोकनगर। बहादुरपुर तहसील क्षेत्र के महोली गांव में रविवार सुबह एक किसान शिवराज सिंह पुत्र लक्ष्मण सिंह दांगी उम्र 65 वर्ष का शव उसी के खेत में खड़े आम के पेड़ पर लटका पाया गया। किसान के गले में तौलिया का फंदा लगा हुआ था। परिजन मृत अवस्था में किसान को सिविल अस्पताल मुंगावली लेकर पहुंचे और यहां दावा किया कि बीते 27 जनवरी में जो ओलावृष्टि हुई है, उसमें किसान की चना और मसूर की फसल बर्बाद हो गई थी। किसान पर कर्जा था, इससे पहले खरीफ की फसल भी खराब हो गई थी। इसी रंज में आकर उसने मौत को गले लगा लिया। बहरहाल, पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच में लिया है, हालांकि किसान के पास से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
दूसरी ओर महोली के पटवारी सुजीत छारी ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने पर वह ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सौरभ यादव के साथ खेतों पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि किसान की मौत दुखद है। किंतु महोली गांव में ओलावृष्टि नहीं हुई और न ही इससे कोई नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि किसान शिवराज सिंह और उसके बेटों जस्सू, राजेश और रामबाबू के पास शामिल खाते की करीब 26 बीघा जमीन है। इसमें शिवराज एवं रामबाबू के शामिल खाते की सर्वे नंबर 29/2 में कुल 2.770 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें गेहूं बोया गया है। किसान ने यह जमीन यूको बैंक मल्हारगढ़ में बंधक कर किसान क्रेडिट कार्ड लिया है। वहीं सर्वे नंबर 115/5/2 रकबा 1.254 हैक्टेयर राजेश पुत्र शिवराज के नाम से है, जिसमें गेहूं की फसल खड़ी है। यह जमीन बंधक नहीं है। इसी तरह मृतक किसान शिवराज के बड़े बेटे जसवंत के नाम से सर्वे नंबर 29/1/3 रकबा 1.416 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें आधे रकबे में चना हैं और आधे रकबे में मसूर की फसल है। सर्वेक्षण दल के मुताबिक रविवार दोपहर में हुए सर्वेक्षण में फसलें स्वस्थ पाई गई हैं, मसूर की फसल आड़ी हो गई है लेकिन उसमें अभी फूल आ रहा है, इसलिए फिर से खड़ी हो जाएगी। किसान के पर कितना ऋण है, इसकी जानकारी नहीं है।
ग्रामीणों ने कहा दो मिनट बरसे ओले, बारिश से हुआ नुकसान
महोली गांव में फसलों के नुकसान के संबंध में दो किसानों से बात हुई है। जिसमें यशकुमार दांगी ने बताया कि उनके पास 35 बीघा जमीन है, जिसमें चना और मसूर की फसल में बारिश से नुकसान हुआ है, उन्होंने कहा कि गांव में केवल दो मिनट ओलावृष्टि हुई थी। इसलिए ओलों के बजाय बारिश ज्यादा होने से नुकसान हुआ। इसी तरह रामराज दांगी ने बताया कि उनकी फसलों में पानी भरा रहने से नुकसान हुआ है। चना और मसूर की फसलें नाजुक होती हैं।
