मुंबई/दिल्ली |अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का कांग्रेस में विलय हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी और शरद पवार के बीच इस विषय पर सैद्धांतिक सहमति बन सकती है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि एनसीपी और कांग्रेस एक छतरी के नीचे आते हैं, तो सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र की पहली महिला मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश किया जा सकता है। यह कदम न केवल राज्य में विपक्ष को मजबूती देगा, बल्कि इतिहास को भी दोहराएगा, जब शरद पवार ने कांग्रेस में वापसी कर नेतृत्व संभाला था।
कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी इस एकीकरण के पक्ष में बताई जा रही हैं। उनका मानना है कि सुप्रिया सुले को चेहरा बनाने से ‘इंडिया’ गठबंधन में नई जान फूंकी जा सकती है। इस रणनीति से न केवल महाराष्ट्र के छोटे दल गठबंधन की ओर आकर्षित होंगे, बल्कि ममता बनर्जी जैसे क्षेत्रीय दिग्गज भी कांग्रेस के साथ अधिक मजबूती से जुड़ेंगे। सुप्रिया सुले की स्वच्छ छवि और शरद पवार के अनुभव का मेल भाजपा के दुर्ग को भेदने के लिए एक अचूक हथियार साबित हो सकता है। इस संभावित बदलाव से पश्चिम भारत की राजनीति का पूरा समीकरण बदलने की उम्मीद है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रिया सुले को आगे करने से देश भर की महिला मतदाताओं के बीच एक सकारात्मक संदेश जाएगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, एनसीपी और कांग्रेस की वैचारिक साम्यता हमेशा से रही है और मौजूदा राजनीतिक दबाव के दौर में एकजुटता ही एकमात्र विकल्प है। यदि सुप्रिया सुले को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाता है, तो यह देश भर में महिलाओं के प्रति कांग्रेस के बढ़ते लगाव को प्रदर्शित करेगा। फिलहाल, सभी की निगाहें शरद पवार के अगले कदम पर टिकी हैं, जो महाराष्ट्र की भावी राजनीति की दिशा तय करेगा।

