भारत-ईयू एफटीए पर जयराम रमेश की टिप्पणी की तुलना ‘अंगूर खट्टे हैं ‘ कहानी से की वाणिज्य मंत्री गोयल ने

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (वार्ता) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर कांग्रेस के मीडिया विभाग प्रभारी और राज्य सभा सदस्य जयराम रमेश की टिप्पणियों की तुलना ‘ लोमड़ी के लिए अंगूर खट्टे हैं’ वाली कहानी से की है।

श्री गोयल ने कहा ” जो लोग ज़मीन से जुड़े लोगों से कोई संपर्क न होने के कारण (अपने समय में) निर्णय नहीं ले पाए, वे आज कुछ न करने को ही एक गुण के रूप में पेश कर रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि ईयू से मुक्त व्यापार के लिए बातचीत कांग्रेस के नेतृत्व में जून 2007 में शुरू हुई थी और मई 2013 में इन्हें स्थगित कर दिया गया। जून 2022 में इन वार्ताओं को फिर से शुरू किया गया।

श्री गोयल ने इसी सप्ताह घोषित भारत-ईयू एफटीए के बारे में सोशल मीडिया पर की गयी टिप्पणियों पर केंद्रित एक बिंदुवार पोस्ट में कहा कि कांग्रेस नीत सरकार ने जो अवसर खोया उसकी भारी कीमत देश के लोगों को चुकानी पड़ी है। इससे देश को बेशकीमती नौकरियों, आय और आर्थिक वृद्धि के अवसरों से वंचित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि जनता ने उनकी ‘ इस निष्क्रियता को कई बार उचित तरीके से दंडित किया है।”

श्री गोयल ने कहा , ‘ मुझे यह बात हैरान करती है कि जब पूरी दुनिया इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कह रही है, तब मेरे मित्र (श्री जयराम) इसे बहुत ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया सौदा मानते हैं।”

वाणिज्य मंत्री ने सवाल किया है कि क्या इस समझौते से 25 लाख करोड़ डॉलर के साथ बाजार का सृजन , 11 लाख करोड़ डॉलर का संयुक्त वैश्विक व्यापार, दो अरब लोगों का साझा बाज़ार और भारत के 33 अरब डॉलर के श्रम-प्रधान निर्यातों पर पहले ही दिन से शुल्क का शून्य हो जाना केवल ‘शोर’ मात्र है

उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता की टिप्पणियों को तथ्यों के बारे में उनकी एक बुनियादी चूक बताया है कि यह समझा जाना चाहिए कि भारत और ईयू की अर्थव्यवस्थाएँ बड़े पैमाने पर एक-दूसरे की पूरक हैं। इसमें एक का लाभ दूसरे का नुकसान नहीं है बल्कि यह दोनों के लिए लाभ और नये अवसरों का समझौता है।

यूरोप में कार्बन कर को लेकर श्री जयराम के सवाल पर श्री गोयल ने कहा है, ” मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि हमारी सरकार ने यूरोप में कॉर्बन आयात पर समायोजन की व्यवस्था (सीबीएएम) के मुद्दे , स्टील, एल्युमिनियम व अन्य क्षेत्रों में हमारे निर्यातकों के हितों को, जितनी गंभीरता से उठाया है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। हमने संवाद, विश्वास और साझेदारों के सहयोग के ज़रिए इन जटिल और संवेदनशील विषयों के समाधान के लिए रचनात्मक रास्ते खोजे हैं — न कि ‘मेरी बात मानो या बाहर निकलो’ जैसी अपरिपक्व, अतार्किक और कठोर सोच से प्रेरित हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत सहित सभी देश स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अपने अपने नियम काननू बनाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। इन अधिकारों को इस तरह अनुशासित किया जाता है कि वे व्यापार में अनावश्यक और अनुचित बाधा न बनें,और इस समझौते में इसके लिए पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं।

श्री गोयल ने कहा है कि इस समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े प्रावधान विश्व व्यापार संगठन के व्यापार से जुड़े बौद्धिक सम्पदा अध्ज्ञिकार (ट्रप्स) के समझौते जैसे ही हैं।

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि समझौते में वाहनों और उनके कल पुर्जों के व्यापार से जुड़े उपबंधों में ” हमारा कोटा-आधारित, प्रीमियम-सेगमेंट पर केंद्रित और चरणबद्ध ऑटो प्रस्ताव (जिसमें विद्युत वाहन के लिए उत्पादन में तकनीकी उन्नयन के लिए विकासशील देशों को बाजार एकीकरण के लिए मिली बढ़ी हुई समय सीमा की ईआईएफ व्यवस्था से 5 वर्ष का अधिक की समय-सीमा है) मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है।

उन्होंने कहा कि पूरी तरह तैयार वाहनों के आयात को उदार बनाने से ईयू के मूल विनिर्माताओं को भारत में स्थानीय असेंबली लाइन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा है कि यह विदेशी वाहन निर्माताओं को “आयात” से “असेंबली” और अंततः “पूर्ण स्थानीयकरण” की ओर ले जाने वाला पहला कदम है, क्योंकि वे स्थानीय सप्लाई चेन विकसित करते हैं। इससे उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाएँ, गुणवत्ता मानक और अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास के व्यवहार भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र में आएँगे।

रूसी तेल आयात पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच यूरोप को पेट्रोलियम ईंधन के निर्यात के बारे में कांग्रेस नेता की आशंकाओं पर श्री गोयल ने कहा कि परिशोषित पेट्रोलियम के निर्यात का मुद्दा बाहरी कारणों से जुड़ा हुआ है। ईयूके साथ हमारा व्यापार समझौता विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी है, जो हमारे व्यापार मार्गों को और मजबूत करेगा।

श्री गोयल ने कहा कि हम सभी को भारत के लिए अवसर खोलने का काम करना चाहिए न कि देश की समृद्धि की यात्रा में बाधा बनने का।

श्री रमेश ने अपनी चिंता में कहा था कि भारत-ईयू एफटीए भारत द्वारा किसी भी व्यापार साझेदार को दी गई अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक रियायत है। इसमें ईयू के 96 प्रतिशत से अधिक निर्यातों पर भारत में शुल्क में कटौती या राहत होगी और इससे वहां से भारत का आयात बढ़ कर दो गुना हो सकता है तथा व्यापार घाटा बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि पहली जनवरी से लागू कार्बन कर से ईयू में भारत के स्टील और एल्यूमीनियम निर्यात में गिरावट आयेगी जो पहले ही कम हो रहा है। 1 जनवरी 2026 से सीबीएएम लागू होने के बाद इसके और गिरने की आशंका है। समय के साथ सीबीएक अन्य औद्योगिक निर्यातों तक भी विस्तारित होगा और एफटीए से मिलने वाले किसी भी लाभ को लगभग निष्प्रभावी कर सकता है। उन्होंने भारतीय निर्यातकों के सामने ईयू में स्वास्थ्य और उत्पाद सुरक्षा संबंधी कड़े नियमों की बाधाओं को लेकर भी चिंता जतायी है।

उन्होंने यह भी कहा था कि इस समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर कई प्रश्न अब भी अनुत्तरित हैं।

श्री जयराम रमेश ने कहा है कि मोदी सरकार ने ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते में पहली बार भारतीय वाहन क्षेत्र को खोला था, और ईयू के साथ यह जोखिम और बढ़ जाता है। पेट्रोलियम ईंधन के बारे में कांग्रेस सांसद ने कहा है, ‘ अंतिम चिंता भारत से ईयू को होने वाले सबसे बड़े निर्यात परिष्कृत ईंधन को लेकर है। इस ईंधन का बड़ा हिस्सा रूस से आता है और अमेरिकी सरकार के दबाव के बीच इन व्यापार मार्गों के भविष्य पर स्पष्टता आवश्यक है।”

 

 

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