भोपाल: हिंदी पत्रकारिता ने आज एक ऐसी आवाज़ खो दी, जो न तो सत्ता से डरी और न ही सिद्धांतों से कभी समझौता किया। वरिष्ठ पत्रकार और हिंदूवादी विचारक ललित श्रीवास्तव का गुरुवार सुबह भोपाल के हजेला अस्पताल में निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को किया जाएगा।
ललित श्रीवास्तव उन विरले पत्रकारों में थे, जिनके लिए पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि विचार और मूल्य थे। उन्होंने जीवन भर पत्रकारिता की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा को प्राथमिकता दी यहां तक कि अपने स्वास्थ्य की कीमत पर भी कभी समझौता नहीं किया। सरकारी सुविधाओं और सत्ता-संरक्षण से दूरी बनाए रखना उनके स्वभाव का हिस्सा था।
सनातन संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता केवल विचारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे तन-मन-धन से सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों में सक्रिय रहे। मित्रों और साथियों के लिए वे हमेशा सहयोग की पहली पंक्ति में खड़े दिखाई देते थे।
उन्होंने अपनी सशक्त लेखनी से अलग पहचान बनाई। विशेष रूप से खेल पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और विश्लेषण की प्रशंसा होती रही।वे अपने पीछे दो पुत्रियां और एक पुत्र छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का पूर्व में ही निधन हो चुका है। सादगी, स्वाभिमान और ईमानदारी उनके व्यक्तित्व की पहचान थी।
