इस्लामाबाद | पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मुस्लिम देशों के बीच नाटो (NATO) की तर्ज पर एक सैन्य गठबंधन बनाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और इजरायल जैसे देशों से बढ़ते कथित खतरों को देखते हुए मुस्लिम राष्ट्रों का एक होना अनिवार्य है। ख्वाजा आसिफ के अनुसार, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए हालिया रक्षा समझौते को एक व्यापक सामूहिक सुरक्षा ढांचे में बदला जा सकता है। उनका मानना है कि यदि मुस्लिम देश अलग-थलग रहे तो उन्हें आसानी से निशाना बनाया जा सकता है, इसलिए एक मजबूत सैन्य और आर्थिक गठबंधन समय की मांग है।
इस संभावित ‘इस्लामिक नाटो’ में तुर्की के शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए ‘स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ (SMDA) के तहत यह प्रावधान है कि एक देश पर हमला होने पर उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान और सऊदी अरब सहमत होते हैं, तो तुर्की को भी इस समझौते का हिस्सा बनाया जाएगा। पाकिस्तान के अन्य मंत्रियों का भी दावा है कि तीनों देशों के बीच इस डील का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो चुका है, जो भविष्य में एक शक्तिशाली त्रिपक्षीय सैन्य ब्लॉक का आधार बनेगा।
यदि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की जैसे सैन्य रूप से सक्षम देश एक साझा रक्षा क्लॉज से बंध जाते हैं, तो यह मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को पूरी तरह बदल देगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन न केवल रक्षा के क्षेत्र में बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। हालांकि, इस तरह के गठबंधन की संभावना ने वैश्विक शक्तियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, क्योंकि नाटो के ‘आर्टिकल-5’ जैसी व्यवस्था मुस्लिम देशों के बीच लागू होने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नए तनाव पैदा हो सकते हैं। फिलहाल पाकिस्तान इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा रहा है।

