सीरिया सरकार और कुर्द बलों के बीच ऐतिहासिक 14-सूत्रीय समझौता: देश भर में युद्धविराम लागू

दमिश्क/अलेप्पो, (वार्ता) सीरिया में पिछले कई दिनों से जारी भारी संघर्ष के बाद आज एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम में सीरिया की अंतरिम सरकार और कुर्द नेतृत्व वाले ‘सीरियाई लोकतांत्रिक बलों’ (एसडीएफ) ने रविवार देर रात एक व्यापक युद्धविराम और एकीकरण वाले एक ऐतिहासिक 14-सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने रविवार को घोषणा की कि इस समझौते के साथ ही देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में जारी हिंसा पर विराम लग जाएगा और कुर्द बलों को औपचारिक रूप से राज्य की मुख्यधारा और सेना में शामिल किया जाएगा।

बीबीसी के अनुसार राष्ट्रपति अहमद अल-शरा और एसडीएफ कमांडर मजलूम अब्दी के बीच हुए इस समझौते का उद्देश्य पिछले दो हफ्तों से जारी भारी संघर्ष को समाप्त करना और देश को एकीकरण की दिशा में ले जाना है। अमेरिकी विशेष दूत टॉम बैरक ने दमिश्क में राष्ट्रपति अल-शरा से मुलाकात के बाद इस समझौते की सराहना करते हुए इसे “एकीकृत सीरिया” की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

सरकारी समाचार एजेंसी (साना) के अनुसार, इस नए समझौते के तहत एसडीएफ के लड़ाके फुरात नदी के पश्चिमी क्षेत्रों से पूरी तरह हटकर पूर्वी तट की ओर चले जाएंगे। इसके बदले में सरकार ने रक्का और दीर अल-ज़ोर प्रांतों का पूर्ण प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण अपने हाथ में लेने का निर्णय लिया है। राष्ट्रपति ने एक विशेष आदेश जारी करके कुर्दिश भाषा को ‘राष्ट्रीय भाषा’ का दर्जा दिया है और कुर्द अल्पसंख्यकों को आधिकारिक मान्यता प्रदान की है। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि एसडीएफ किसी भी लड़ाके या प्रशासनिक कर्मचारी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इस समझौते के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु के तहत एसडीएफ के सभी सैन्य और सुरक्षा कर्मियों का व्यक्तिगत आधार पर सीरियाई रक्षा और आंतरिक मंत्रालयों में पूर्ण एकीकरण किया जाएगा। इसके बदले में एसडीएफ ने हसाका, दीर अल-ज़ोर और रक्का जैसे महत्वपूर्ण उत्तरी और पूर्वी प्रांतों का प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण केंद्र सरकार को सौंपने पर सहमति जताई है। साथ ही, सीमा चौकियों और तेल व गैस क्षेत्रों का प्रबंधन भी अब सीरियाई राज्य के अधीन होगा, जिससे देश के मुख्य संसाधनों पर सरकारी नियंत्रण बहाल हो सकेगा।

इस शांति समझौते से ठीक पहले उत्तरी सीरिया के अलेप्पो और रक्का में हालात बेहद तनावपूर्ण थे। सीरियाई सेना ने तबका शहर और उसके सामरिक हवाई अड्डे सहित फुरात नदी के पास स्थित कई तेल क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। अलेप्पो में हुई झड़पों के कारण हजारों नागरिकों को विस्थापित होना पड़ा था और दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ था। हालांकि, रविवार को युद्धविराम लागू होने के बाद अग्रिम मोर्चों पर शांति देखी जा रही है और सेना उन क्षेत्रों को सुरक्षित करने में जुटी है जहां से कुर्द लड़ाके पीछे हटे हैं।

इस समझौते में अमेरिका की भी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है, जिसने दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की। अमेरिकी दूत ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि वे इस युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए लगातार संपर्क में हैं। दूसरी ओर, सीरियाई सरकार ने तबका जेल और अन्य क्षेत्रों में हुई हत्याओं के आरोपों की जांच की बात कही है, जबकि एसडीएफ ने इन आरोपों को खारिज किया है। इस समझौते को सीरिया में ‘असद शासन’ के पतन के बाद देश को एकजुट करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

कुर्द अधिकारों को मान्यता देते हुए सीरियाई सरकार ने कुर्द संस्कृति और भाषा को आधिकारिक दर्जा देने का वादा किया है, जिसमें कुर्द नए साल (नौरोज़) को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करना भी शामिल है। इसके अलावा, समझौता यह भी सुनिश्चित करता है कि सीरिया अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के सक्रिय सदस्य के रूप में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा। सरकार अब उन जेलों और शिविरों की पूरी कानूनी जिम्मेदारी संभालेगी जहां हजारों विदेशी आईएसआईएस लड़ाके और उनके परिवार कैद हैं।

संधि की अन्य शर्तों के अनुसार, एसडीएफ ने गैर-सीरियाई पीकेके (कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी) के सदस्यों को देश की सीमाओं से बाहर निकालने की प्रतिबद्धता जताई है ताकि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, कोबानी जैसे शहरों से भारी सैन्य उपस्थिति हटाई जाएगी और वहां स्थानीय निवासियों से बनी सुरक्षा इकाइयों की तैनाती होगी। यह समझौता दशकों के संघर्ष के बाद सीरिया के विभिन्न समुदायों के बीच राष्ट्रीय साझेदारी और विश्वास बहाली की एक नई उम्मीद लेकर आया है।

 

 

 

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