
जबलपुर। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी ट्रायल कोर्ट ने प्रकरण की निर्धारित समय सीमा में अंतिम सुनवाई नहीं करते हुए अगली तारीख के लिए बढा दिया। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा कि इससे मुक़दमे लड़ने वालों पर न्यायिक अनुशासन तथा पदक्रम टूटने के दुखद संकेत के तौर पर गलत असर पड़ेगा। एकलपीठ ने प्रकरण को दूसरे न्यायालय में स्थानातंरण करने के आदेश जारी किये हैं।
सीधी जिला न्यायालय में साल 2013 में सिविल केस दायर किया गया था। सिविल केस की जल्द सुनवाई करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए नवम्बर 2025 में प्रकरण की अंतिम सुनवाई 6 माह में करने के आदेश जारी किये थे। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी ट्रायल के जज के आदेश में कहा गया था कि वह चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट इंचार्ज के साथ-साथ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के मामलों की भी देखरेख करनी पड़ती है। छह हफ़्ते के अंदर केस का फैसला करना मुमकिन नहीं है और सिर्फ़ 8 जनवरी, 2026 को मामले पर विचार करने के लिए केस को पोस्ट कर दिया।
जिसके बाद याचिकाकर्ता ने प्रकरण दूसरे न्यायालय में स्थानातरित किये जाने की मांग करते हुए आवेदन दायर किया था। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट ने आवेदन को खारिज कर दिया था। जिसके कारण याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। एकलपीठ ने ट्रायल जज के आदेश पर हैरानी जताते हुए कहा है कि वह छह हफ़्ते की समय सीमा के अंदर मामले का फ़ैसला करने की स्थिति में नहीं हैं। ट्रायल कोर्ट ने मामले को उठाने की कोई कोशिश नहीं की और तारीख छह हफ़्ते से आगे तय कर दी, जो शायद अपनी बड़ाई दिखाने या ट्रायल जज द्वारा हाई कोर्ट के आदेश से नाराज़ होने का संकेत हो सकता है। ऐसे मामले मुक़दमे लड़ने वालों के मन में न्यायिक अनुशासन और पदानुक्रम के टूटने के दुखद संकेत के तौर पर गलत असर डालते हैं। जब सिविल जज हाईकोर्ट द्वारा तय समय सीमा के अंदर मामले को लिस्ट करने से भी मना कर देता है। एकलपीठ ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को प्रकरण दूसरे ट्रायल जज के पास ट्रांसफर करने का आदेश दिया।
