रायसेन की अनूठी परंपरा: साल में दूसरी बार रावण दहन के साथ 115 वर्ष पुराना रामलीला मेला संपन्न

रायसेन। मध्यप्रदेश का रायसेन नगर संभवत: पहला ऐसा नगर है, जहां साल में दो बार रावण का पुतला जलाने की परंपरा है।दरअसल रायसेन में वार्षिक रामलीला मेले में रामलीला के मैदानी मंचन के तहत शुक्रवार रात 10 बजे रावण वध के बाद दशहरे की ही तरह 35 फिट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान पूरा नगर इस आयोजन में शामिल हुआ। पिछले 115 सालों से आयोजित होने वाले प्रसिद्ध रामलीला मेले का आज एक महीने बाद रावण दहन के बाद समापन किया गया।इस अवसर पर पूर्व मंत्री एव स्थानीय विधायक डॉ प्रभुराम चौधरी विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने अयोध्या में भव्य रामलला मंदिर को देखने आए पश्चिम बंगाल के श्रद्धालुओं के अनुभवों को साझा किया। रावण वध के मौके पर उन्होंने सभी को बधाई दी एवं भगवान राम के चरित्र को अपनाने की बात करते हुए भारत में राम के महत्व पर विस्तार से बात कही।रायसेन में लगने वाले इस प्रसिद्ध रामलीला मेले में पूरे एक महीने रामलीला का मैदानी मंचन किया जाता है, जो देश में कम ही स्थानों पर देखने को मिलता है।रायसेन का प्रसिद्ध रामलीला मेला आसपास के क्षेत्र में मैदानी रामलीला के मंचन के लिए जाना जाता है। इस रामलीला में मंचन करने वाले सभी कलाकार स्थानीय होते हैं, जो अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

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