नई दिल्ली | 09 जनवरी, 2026: क्रेडिट कार्ड का उपयोग आज की जीवनशैली का अहम हिस्सा बन गया है, लेकिन कार्ड धारक की अचानक मृत्यु होने पर बकाया बिल की वसूली एक जटिल प्रक्रिया होती है। बैंक नियम के अनुसार, क्रेडिट कार्ड एक ‘असुरक्षित ऋण’ (Unsecured Loan) की श्रेणी में आता है। इसलिए, बैंक बकाया राशि की वसूली केवल मृतक के नाम पर मौजूद संपत्तियों, बैंक बैलेंस या निवेश से ही कर सकता है। कानूनी तौर पर, बैंक मृतक के परिवार के सदस्यों या कानूनी वारिसों को अपनी जेब से भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है, जब तक कि वे कार्ड में सह-आवेदक न हों।
यदि मृतक के पास कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है या संपत्ति की कुल कीमत बकाया बिल से कम है, तो बैंक को शेष राशि का नुकसान खुद वहन करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बैंक बकाया राशि को अपनी बैलेंस शीट में ‘बैड डेट’ या एनपीए (NPA) मानकर बट्टे खाते में डाल देता है। वसूली की प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्रेडिट कार्ड खाते को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाता है। यह प्रावधान इसलिए है क्योंकि क्रेडिट कार्ड के लिए कोई भी संपत्ति गिरवी नहीं रखी जाती, जिससे बैंक का जोखिम अधिक रहता है।
बैंक किसी भी ग्राहक को क्रेडिट कार्ड जारी करने या उसकी लिमिट तय करने से पहले उसकी वित्तीय स्थिरता की गहन जांच करते हैं। इसमें ग्राहक की मासिक आय, नौकरी की प्रकृति और सबसे महत्वपूर्ण रूप से ‘क्रेडिट स्कोर’ (CIBIL) की भूमिका होती है। एक अच्छा क्रेडिट स्कोर न केवल अधिक क्रेडिट लिमिट सुनिश्चित करता है, बल्कि बैंक को यह भरोसा भी दिलाता है कि कार्ड धारक उधार चुकाने के प्रति जिम्मेदार है। आय का स्तर और खर्च करने का पैटर्न यह तय करने में मदद करता है कि विपरीत परिस्थितियों में बैंक का जोखिम कितना कम रहेगा।

