नई दिल्ली | 08 जनवरी, 2026: रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका के बढ़ते दबाव और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी के बीच पोलैंड ने भारत का समर्थन किया है। पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि वे इस बात से संतुष्ट हैं कि भारत ने रूसी तेल आयात में धीरे-धीरे कटौती शुरू कर दी है। सिकोरस्की ने माना कि भारत अपनी ऊर्जा रणनीति को संतुलित कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने पहली बार ‘वीमर ट्रायंगल’ (फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड) समूह के साथ उच्च स्तरीय वार्ता में हिस्सा लिया है, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
पेरिस में आयोजित इस सम्मेलन में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोप के साथ रिश्तों को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया। जयशंकर ने फ्रांसीसी और जर्मन प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात कर भारत-ईयू संबंधों, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक मुद्दों पर गहराई से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोप वैश्विक राजनीति का एक महत्वपूर्ण ध्रुव है और भारत उसके साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करना चाहता है। आने वाले हफ्तों में भारत जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी करने वाला है, जो भारत की संतुलित विदेश नीति का हिस्सा है।
आर्थिक मोर्चे पर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच बेहतर तालमेल बिठा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जो 34 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, वह अब घटकर 25 प्रतिशत से नीचे आ गई है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के मुताबिक, जनवरी 2026 की शुरुआत में रूसी तेल की दैनिक खरीद में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। ‘वीमर ट्रायंगल’ के साथ भारत की यह पहली औपचारिक बातचीत न केवल सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगी, बल्कि अमेरिका द्वारा दी जा रही व्यापारिक धमकियों के बीच भारत को एक मजबूत वैश्विक विकल्प भी प्रदान करेगी।

