इंदौर:भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैले संक्रमण को लेकर बुधवार को भी सघन उपचार और सर्वे अभियान जारी रहा. हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाया है. कलेक्टर के निर्देश पर संक्रमण फैलने की आशंका वाले आसपास के क्षेत्रों को भी कवर करते हुए 21 मेडिकल और सर्वे टीमें बनाई हैं. इनमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं.
सीएमएचओ डॉक्टर माधव हसानी ने बताया कि टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और उबला पानी पीने, बाहर का खाना और कटे फल न खाने की समझाइश दे रही हैं. वहीं किसी भी संदिग्ध मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 11 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं, जबकि क्षेत्र में 24 घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी लगा दी गई है.
वहीं गंभीर मरीजों को एमवाय अस्पताल, अरविंदो अस्पताल और बच्चों को चाचा नेहरू अस्पताल में रेफर किया जा रहा है. निजी अस्पतालों में जाने वाले मरीजों के लिए भी निःशुल्क इलाज, जांच और दवाओं के निर्देश हाई कमान ने दिए हैं. डॉक्टर हसानी ने यह भी बताया कि अब तक 7,992 घरों का सर्वे किया जा चुका है, जिसमें 39,854 लोगों की जांच की. इस दौरान 2,456 संदिग्ध मरीज मिले, जिन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार दिया. अब तक 212 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है. जिनमें से 50 को डिस्चार्ज हो चुके है, फिलहाल 162 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 26 मरीज आईसीयू में उपचाररत हैं.
प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संभाग आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी ने भागीरथपुरा पहुंचकर हालात का जायजा लिया. अधिकारियों ने प्रभावित लोगों से चर्चा की और मौके पर चल रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली.
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि अब तक गंदा पानी पीने से बीमार चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि मौतों का आंकड़ा आज 12 हो गया है. उन्होंने कहा कि बीमार लोगों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों के साथ राजस्व अधिकारियों को भी समन्वय के लिए तैनात किया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी निजी अस्पतालों में निःशुल्क उपचार सुनिश्चित कराया जा रहा है. प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और क्षेत्र में सतत निगरानी की जा रही है
