
जबलपुर। अंगदान, जीवनदान की सार्थकता पर अमल करते हुए वर्ष 2025 में जबलपुर में 3 बार ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस दौरान मृत व्यक्तियों के ऑर्गन भोपाल, अहमदाबाद और इंदौर भेजे गए जहां कई जिंदगियों के चिराग रोशन हुए। मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस की त्वरित समन्वय व्यवस्था ने इन जीवन रक्षक अभियानों को पूरी तरह सफल बनाया। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना, मेडिकल अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा के अनुसार अंगदान की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है और समय का विशेष महत्व होता है। इसलिए ग्रीन कॉरिडोर की अपने आप में बहुत महत्वता रही।
सत्येंद्र ने दिया 3 को जीवनदान
जानकारी के अनुसार सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 31 वर्षीय सत्येंद्र यादव को अगस्त 2025 में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिजनों की सहमति से उनके अंगदान का निर्णय लिया गया। नोटो (नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) को सूचना देने के बाद अहमदाबाद, भोपाल और जबलपुर के मरीजों को शॉर्टलिस्ट किया गया। युवक का हार्ट अहमदाबाद में 21 वर्षीय मरीज को, लीवर भोपाल में 56 वर्षीय मरीज को और एक किडनी जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 46 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित की गई। अंगों को मेडिकल कॉलेज से डुमना एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए 21 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। फिर डुमना एयरपोर्ट से विशेष विमान द्वारा हार्ट अहमदाबाद और लीवर भोपाल भेजा गया।
पूरन ने बचाई 2 जिंदगियां
भेड़ाघाट शिल्पी नगर निवासी पूरण सिंह चौधरी सड़क हादसे में घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनके निधन के बाद परिजनों ने प्रेरणादायक निर्णय लेते हुए अंगदान किया। उनकी दोनों किडनियों के साथ आंखों और त्वचा का भी दान किया गया। 7 मार्च 2025 को दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। पहला सुपर स्पेशलिटी मेडिकल अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक, जहां से एक किडनी एयर एम्बुलेंस से इंदौर भेजी गई। दूसरा मेडिकल कॉलेज से जबलपुर के एक निजी अस्पताल तक बनाया गया, जहां दूसरी किडनी का प्रत्यारोपण किया गया।
भोपाल, इंदौर भेजे गए ऑर्गन्स
जनवरी 2025 में दिव्यांग संत बलीभगत उर्फ पंडित बलिराम की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिजनों की सहमति से अंगदान किया गया। उनका हार्ट भोपाल एम्स और लीवर इंदौर के चोइथराम अस्पताल भेजा गया। किडनी खराब होने के कारण उसका उपयोग नहीं हो सका। इस प्रक्रिया के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट और मेडिकल कॉलेज परिसर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
