नई दिल्ली। 27 दिसंबर, 2025। भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने लेनदेन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है, लेकिन हालिया रिपोर्ट देश में एक गहरे ‘डिजिटल डिवाइड’ को उजागर करती है। नवंबर के आंकड़ों के अनुसार, जनसंख्या के अनुपात में दिल्ली प्रति व्यक्ति मासिक 23.9 लेनदेन के साथ देश में शीर्ष पर है, जबकि गोवा (23.3) और तेलंगाना (22.6) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। बड़े राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र 17.4 लेनदेन के साथ अव्वल है। इसके विपरीत, बिहार और त्रिपुरा जैसे राज्यों में प्रति व्यक्ति मासिक लेनदेन का औसत 4 से भी कम है, जो दर्शाता है कि महाराष्ट्र में डिजिटल भुगतान की रफ्तार बिहार की तुलना में लगभग सात गुना अधिक है।
लेनदेन की वैल्यू या मूल्य के लिहाज से तेलंगाना ने बाजी मारी है, जहाँ प्रति व्यक्ति मासिक यूपीआई ट्रांजेक्शन की औसत वैल्यू 34,800 रुपये दर्ज की गई है। इसके बाद गोवा (33,500 रुपये) और दिल्ली (31,300 रुपये) का नंबर आता है। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण-पश्चिम कॉरिडोर (महाराष्ट्र से कर्नाटक और तेलंगाना तक) एक परिपक्व डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है। दूसरी ओर, बिहार और त्रिपुरा में यह औसत मात्र 5,100 से 5,400 रुपये के बीच सिमटा हुआ है। यह अंतर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों में ‘व्यक्ति-से-मर्चेंट’ (P2M) डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मर्चेंट एक्सेप्टेंस की बड़ी कमी को प्रदर्शित करता है।
वर्तमान में यूपीआई हर महीने 20 अरब से अधिक लेनदेन को संभाल रहा है और कुल डिजिटल भुगतान में इसकी हिस्सेदारी 85 प्रतिशत तक पहुँच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल पेमेंट अपनाने की गति मुख्य रूप से प्रति व्यक्ति आय, शहरीकरण के स्तर और स्थानीय व्यापारियों द्वारा डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर निर्भर करती है। हालांकि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में नकदी की कमी के कारण लोग डिजिटल विकल्पों पर निर्भर हो रहे हैं, लेकिन झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य अब भी राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खाई को पाटने के लिए पूर्वी भारत में मर्चेंट नेटवर्क को और मजबूत करना होगा।

