किराया वृद्धि विवाद के बीच कांग्रेस नेता अजय कुमार ने रेल सुरक्षा सुधारों की मांग की

नयी दिल्ली, 22 दिसंबर (वार्ता) कांग्रेस नेता अजय कुमार ने सोमवार को यात्रियों की सुरक्षा के लिए देश की सभी रेलवे लाइनों पर सुरक्षा कवच लगाने तथा रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायतें बहाल करने की मांग की। श्री कुमार ने यहां संवाददाता सम्मेलन में किराया वृद्धि की हालिया घोषणाओं को आम आदमी के लिए “नए साल का एक घटिया तोहफा” बताया। उन्होंने सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उस पर रेलवे को जनसेवा के बजाय “वसूली का जरिया” बनाने का आरोप लगाया और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भारतीय रेलवे की बिगड़ती स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराते हुये उनसे इस्तीफे की मांग की।

उन्होंने 2024 के चुनावों के बाद से सरकार द्वारा बार-बार किराया बढ़ाने पर प्रकाश डाला और बताया कि प्रति किलोमीटर किराया 2014 में 32 पैसे से बढ़कर आज 67 पैसे हो गया है, जो दोगुने से भी अधिक है। उन्होंने सरकार के संचार के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि रेल मंत्री वैष्णव ने आधिकारिक घोषणा के बजाय परिपत्र के माध्यम से पत्रकारों को सूचित करना चुना। श्री कुमार ने यात्रियों के खराब अनुभवों की ओर ध्यान दिलाया और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें रेलवे के भोजन को “मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त” बताया गया है, जबकि 2014 से भोजन की कीमतें 30 रुपये से बढ़कर 120 रुपये हो गई हैं। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायतों को समाप्त करने की निंदा करते हुए इसे “8,600 करोड़ रुपये की लूट” बताया और जोर दिया कि इन रियायतों से बुजुर्ग नागरिक अपने परिवार से मिलने और तीर्थयात्रा पर जाने में सक्षम होते थे।

रेल मंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए श्री कुमार ने उन्हें “रील मंत्री” करार दिया और परिचालन सुरक्षा की बजाय सोशल मीडिया प्रचार पर उनके ध्यान की आलोचना की। सरकार बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक आवंटित कर रही है, लेकिन “कवच” टक्कर रोधी सुरक्षा प्रणाली केवल 3 प्रतिशत रेलवे लाइनों पर ही स्थापित है, जिससे 97 प्रतिशत लाइनें असुरक्षित है। उन्होंने कहा , “वर्ष 2014 से अब तक 712 ट्रेन दुर्घटनाएं और 768 मौतें हो चुकी हैं। हमारी मांग सीधी है: बुलेट ट्रेन परियोजना को रोकें और प्रतिदिन यात्रा करने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।” उन्होंने सरकार और उसके वैचारिक सहयोगियों पर बेरोजगारी, महंगाई और अपर्याप्त सार्वजनिक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सांप्रदायिक बयानबाजी से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत की हालिया टिप्पणियों की आलोचना करते हुए उन्हें “लगातार ध्यान भटकाने वाले विषय” बताया, जिनका उद्देश्य समाचारों में छाना और आर्थिक चिंताओं को दरकिनार करना है।

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