मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
आलीराजपुर में जल-जंगल, जमीन मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी आलीराजपुर के पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश पटेल साथ आ गए. क्षेत्र में विगत कई समय से महेश पटेल अतिक्रमण के नाम पर आदिवासियों की बेदखली के खिलाफ आंदोलनरत थे. इसे प्रदेश कांग्रेस इकाई ने पटेल का व्यक्तिगत आंदोलन बताते हुए कह दिया था कि कांग्रेस का इससे कोई लेना-देना नहीं है. तब से पटेल जीतू पटवारी से खफा थे. इतने नाराज थे कि उन्होंने पटवारी को चेतावनी भी दे डाली थी कि वे हमारे क्षेत्र में कोई सभा भी करके बता दें.
अंतत: उपर से आए आदिवासी बेदखली को मुद्दा बनाने के निर्देश के बाद कांग्रेस के बैनर तले बड़ा आंदोलन के लिए पटवारी को महेश पटेल को मनाना पड़ा. इसके बाद विगत दिनों अलीराजपुर जिले की जोबट विधानसभा क्षेत्र के ग्राम डाबड़ी में विशाल आदिवासी अधिकार यात्रा का आयोजन हो पाया. इसमें प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, उमंग सिंगार, प्रभारी संजय दत्त, कांतिलाल भूरिया तक शामिल हुए. यह क्षेत्र में आयोजित कांग्रेस आंदोलन का पहला मौका रहा, जिसमें एकजुटता का समावेश था. इसमें गुटीय राजनीति त्याग सभी क्षेत्रीय नेताओं ने शिरकत की.
मुसीबत में फंसे उमंग सिंघार
नेशनल हेल्थ मिशन के प्रोग्राम मैनेजर विजय पांडे पर झूठे आरोप के मामले में विधान सभा नेता प्रतिपक्ष गंधवानी विधायक उमंग सिंघार उलझ गए हैं. प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरने के लिए इस मुद्दे को उन्होंने विधान सभा सिर पर उठा ली थी. पांडे को पद‘युत करवाने हेतु विधानसभा में बड़ा हंगामा किया गया था और सरकार को विजय पांडे को पद से बेदखल करना पड़ा था.
सिंघार व अन्य नेताओं ने नेशनल हेल्थ मिशन के प्रोग्राम मैनेजर पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने फर्जी मार्कशीट के जरिए नौकरी ली है. जांच में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने मॉर्कशीट को सही बताया. सब सही होने के बाद विजय पांडे ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था. अब एमपी-एमएलए कोर्ट ने उमंग सिंघार सहित अन्य नेताओं को नोटिस जारी कर 16 जनवरी को कोर्ट में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है. पहले से ही कई मामलों में फंसे सिंघार इस नई मुसीबत से कैसे बाहर निकलते हैं वक्त बताएगा.
निशाने पर कौन था?
उमंग सिंघार ने विगत दिनों प्रदेश युवा कांग्रेस की बैठक में संगठन की नियुक्तियों को लेकर युवा नेताओं को सीख दी कि मारुति की गाड़ी में जेसीबी का टायर लगाओगे तो गाड़ी नहीं चल पाएगी, गलत चयन से संगठन नहीं चल पाएगा. नेता पैराशूट से आएं या जमीन से, असली फर्क सोच का होता है. जब तक गरीब की झोपड़ी में टपकती बारिश का दर्द महसूस न हो, जब तक 10-15 किलोमीटर चलकर खाली थैली लौटती बूढ़ी मां का संघर्ष न दिखे, तब तक राजनीति समझ नहीं आती.
इसके बाद से सियासतदान कयास लगा रहे हैं कि निशाने पर कौन था. चूंकि बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मौजूद थे और बैठक के पहले ही पटवारी की संगठन नियुक्तियां प्रदेश प्रभारी ने रद्द कर दी थी, ऐसे में लोग सिंघार का इशारा उनकी तरफ ही समझ रहे हैं. हालांकि बाद में पटवारी की ही सूची को पदनाम बदलकर हरी झंडी मिल गई थी
