अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंधों का ऐलान किया

वाशिंगटन, 21 नवंबर (वार्ता) अमेरिका ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य ईरान के अवैध पेट्रोलियम, शिपिंग और विमानन नेटवर्क को ध्वस्त करना है, जो देश की सेना और क्षेत्रीय छद्म ताकतों को धन मुहैया कराते हैं।

विदेश एवं वित्त विभागों ने एक समन्वित कार्रवाई में, भारत, पनामा, संयुक्त अरब अमीरात, सेशेल्स और जर्मनी सहित कई देशों की दर्जनों कंपनियों, व्यक्तियों, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाया, जिन पर कथित रूप से तेहरान को प्रतिबंधित तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को ले जाने और बेचने में मदद करने का आरोप है।

विदेश विभाग ने कहा कि उसने 17 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाया है जबकि वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने 41 अतिरिक्त लक्ष्यों पर प्रतिबंध लगाया है, जिससे ईरानी राजस्व स्रोतों को रोकने वाले अमेरिका के अभियान में तेजी आई है।

वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य ईरानी शासन के परमाणु हथियारों के विकास और आतंकवादी संगठनों को समर्थन के लिए वित्त पोषण को रोकना है। उन्होंने कहा कि ईरान के तेल राजस्व को बाधित करना उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण है।

विभाग ने कहा कि इजरायल के साथ 12 दिवसीय युद्ध में हार के बाद, ईरान की सेना अपने वार्षिक बजट की पूर्ति तथा अपनी कमजोर सेना के पुनर्निर्माण के लिए ईरानी कच्चे तेल की बिक्री पर ज्यादा निर्भर हो गई है।

प्रतिबंध मुख्य रूप से ईरानी सेना की तेल-बिक्री शाखा, सेपेहर एनर्जी जहान नामा पार्स कंपनी पर केंद्रित है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह समूह मुखौटा कंपनियों का एक वैश्विक जाल और टैंकरों का एक शैडो बेड़ा चलाता है जो हर साल अरबों डॉलर का कच्चा तेल ढोते हैं। हाल ही में इज़रायल के साथ हुए 12-दिवसीय युद्ध में हार के बाद ईरान इसी राजस्व पर निर्भर रहा है।

संयुक्त अरब अमीरात, पनामा, भारत, ग्रीस और जर्मनी की कंपनियों पर ईरानी कच्चे तेल के कथित परिवहन, वित्तपोषण या खरीद के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात स्थित लुआन बर्ड शिपिंग, मार्स इन्वेस्टमेंट और मून लाइन प्लास्टिक्स, पनामा की लॉयर शिपिंग, ग्रीस की अल्टोमारे एस.ए. और भारत की आरएन शिप मैनेजमेंट शामिल हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों ने जहाज-से-जहाज स्थानांतरण में मदद की, दस्तावेज़ों में हेराफेरी की और प्रतिबंधित कच्चे तेल के स्रोत को छिपाने के उद्देश्य से भारी छूट पर बड़ी तेल खरीद पर बातचीत की। अमेरिका ने ईरान के शैडो बेड़े पर अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए उन टैंकरों के मालिकों और संचालकों को भी चिन्हित किया है जिन्होंने लाखों बैरल ईरानी कच्चे तेल, ईंधन तेल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस को एशिया भर के खरीदारों तक पहुंचाया है।

प्रतिबंधित संगठन अमेरिका की विशेष रूप से नामित नागरिकों की सूची से अपना नाम हटाने के लिए याचिका दायर कर सकते हैं। सूची में भारत स्थित पेट्रोलियम उत्पाद व्यापारी, टीआर6 पेट्रो इंडिया एलएलपी भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने वाली संस्थाओं में शामिल है।

विदेश विभाग के अनुसार, कंपनी ने अक्टूबर 2024 और जून 2025 के बीच ईरान से जुड़े कई आपूर्तिकर्ताओं से 80 लाख अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा मूल्य का ईरान में तैयार बिटुमेन आयात किया। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि टीआर6 पेट्रो इंडिया एलएलपी पर ईरान के साथ तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में जानबूझकर शामिल होने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। वाशिंगटन का कहना है कि इस गतिविधि से तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए राजस्व जुटाने में मदद मिलती है। भारतीय कंपनी को ईरान के अवैध तेल व्यापार पर नवीनतम अमेरिकी कार्रवाई के अंतर्गत लक्षित संस्थाओं की श्रेणी में रखा गया है।

 

 

 

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