
टीकमगढ़। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने स्कूल बस और वैन संचालित करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए थे. जिसमें स्कूल बस और वैन का रंग पीला होना, स्पीड गवर्नर जीपीएस सीसीटीवी कैमरा स्कूल बस के आगे और पीछे स्कूल बस लिखा होना और हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट अंकित होना, बस और वैनकी खिड़कियों में ग्रिल की अनिवार्यता, महिला अटेंडेंट की मौजूदगी स्कूल बस और वैन का वैध परमिट और ड्राइवर के लिए 5 साल का अनुभव फिटनेस सर्टिफिकेट, स्कूल बस और वै न में प्राथमिक चिकित्सा किट अग्निशामक यंत्र होना अनिवार्य कर दिया गया था । बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का प्राइवेट स्कूल संचालक द्वारा संचालित स्कूल बसों और वैनो में पालन नहीं हो रहा है जिससे बच्चों की जिंदगी खतरे में है।
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाली स्कूल बस और वैन का जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस विभाग ना निरीक्षण कर कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ती की जा रही है। जिम्मेदार विभागों को चाहिए कि वह तत्काल शासन द्वारा जारी नियमों का उल्लंघन करने वाली स्कूल बस और वैन का निरीक्षण कर कार्रवाई करें और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करा ना सुनिश्चित कराये ऐसा करने से होने वाली दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। संबंधित विभाग और जिला प्रशासन हादसों का इंतजार कर रहा है।
शहर सहित क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में संचालित प्राइवेट स्कूलों की बस और वैनो को जो ड्राइवर चला रहे हैं अधिकांश ड्राइवर के पास 5 साल का अनुभव फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं है जो जानकारी मीडिया के सामने आ रही है उसने यह साबित कर दिया है कि चंद पैसों की लालच में प्राइवेट स्कूल संचालक स्कूल वैन और बस में कम वेतन वाले ड्राइवर रखकर बच्चों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं लालबर्रा क्षेत्र में ऐसे दर्जनों स्कूल संचालित हो रहे हैं जिनके स्कूल वाहन में अनुभव विहीन ड्राइवर स्कूल बस और वैन चला रहे हैं।
