
नई दिल्ली, 10 नवम्बर (वार्ता): डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को सेबी (SEBI) ने अलर्ट किया है। बाजार नियामक ने स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल गोल्ड’ या ‘ई-गोल्ड’ जैसे उत्पाद न तो सुरक्षित निवेश के रूप में लिस्ट हैं और न ही सेबी के नियामक दायरे में आते हैं। सेबी ने कहा कि ऐसे उत्पादों को आसान निवेश विकल्प बताकर बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इनमें निवेश करने वाले निवेशकों को कई तरह के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल गोल्ड उत्पाद न तो सेबी के अधीन आते हैं, न ही आरबीआई के, जिससे यह पूरा क्षेत्र जोखिम से भरा हुआ है। यदि प्लेटफॉर्म बंद हो गया या दिवालिया हो गया, तो निवेशक की रकम फंस सकती है, भले ही ब्रांड नामी क्यों न हो। इसके अलावा, कई प्लेटफॉर्म एक निश्चित समयसीमा के बाद स्टोरेज शुल्क लेते हैं, जो लंबे समय में बोझ बन सकता है।
सेबी ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे निवेश से पहले सभी दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ें। निवेशकों को यह जांचना चाहिए कि प्रोवाइडर की कस्टोडियन कंपनी कौन सी है, स्टोरेज का बीमा है या नहीं, और कंपनी का ऑडिट होता है या नहीं। इसके अलावा, शुद्धता, रिडेम्पशन विकल्प और स्टोरेज शुल्क की पारदर्शिता की जाँच करना भी बेहद अहम है।
