
जबलपुर । शहर डुमना एयरपोर्ट मध्य भारत के सर्वश्रेष्ठ हवाई अड्डों में शामिल है, जिसकी यात्री क्षमता 400 है और एक साथ 400 कारें पार्क की जा सकती है। यहां एयरबस और ए-321 आसानी से आ जा सकता है। वहीं एक साथ में एक एयरबस, तीन एटीआर या एक साथ पांच एटीआरएस की पार्किंग हो सकती है। नाइट लैंडिंग सुविधा भी है। यह बात हाईकोर्ट के निर्देश पर पिछले दिनों डुमना एयरपोर्ट पर हुई बैठक में एयरपोर्ट डायरेक्टर आरआर पाण्डे ने कही। वहीं डीजीसीए की तरफ से आए सहायक निदेशक वायु सुरक्षा दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि विमान कम्पनियां यदि नए विमानों को शुरू करने के लिए समय सारणी में बदलाव चाहती हैं, तो उन्हें स्लॉट प्रदान किया जाएगा। विमान कम्पनियों को मुख्य मार्ग समेत दूरस्थ और कम सेवा वाले शहरों को भी जोड़ना चाहिए। हाल ही में इस बैठक के मिनिट्स जारी हुए, जिसमें एयरपोर्ट, राज्य सरकार, डीजीसीए समेत अन्य ने नए विमानों को शुरू करने के लिए हर सहयोग की बात कही, लेकिन विमान कम्पनियों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष पीजी नाजपांडे, सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव और अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कहा कि भारत सरकार के 2025-26 के बजट में प्रमुख शहरों के लिए हवाई संपर्क बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसमें जबलपुर भी शामिल होना चाहिए। उड़ानों की कमी के कारण शहर का ऐतिहासिक और पर्यटन केंद्र होने का दर्जा कम हो रहा है।अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन में गिरावट आ रही है। एयरलाइनों को ग्राहक सर्वेक्षण करा विमानों का संचालन करना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी, अल्का सिंह और विनीता आहूजा ने कहा कि जबलपुर में उच्च न्यायालय, पश्चिम मध्य रेलवे ज़ोन, एमआरईवी और कई राज्य और केंद्र सरकार के कार्यालयों का मुख्यालय है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, चिकित्सा विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख विश्वविद्यालय, आयुध निर्माणी, वाहन निर्माणी और तोपगाड़ी निर्माणी, अनुसंधान केंद्र और अस्पताल है। इन सभी के लिए अक्सर हवाई यात्रा की आवश्यकता होती है। शहर में रहने वाले बड़ी संख्या के परिवार पुणे, बैंगलोर, हैदराबाद और चेन्नई जैसे प्रमुख कार्पोरेट केंद्रों में रहते हैं, इसके चलते नियमित सीधी उड़ानें आवश्यक। कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच राष्ट्रीय उद्यानों जैसे पर्यटन स्थलों का प्रवेश द्वार है। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। अन्य शहरों के मुकाबले उड़ाने कम।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इंडिगो एयरलाइंस फ्लायर्स से अपेक्षाकृत अधिक किराया वसूलती है। यही कारण है कि शहर के लोगों को भोपाल और नागपुर जैसे शहरो से उड़ान लेनी पड़ती है। वही एयर लाइंस अक्सर अपने उड़ान कार्यक्रम में अंतिम समय में बदलाव करती है, जिससे फ्लायर्स को असुविधा होती है। दिल्ली की वर्तमान उड़ानों का समय सही नहीं है। इसे बदला जाना चाहिए। राज्य सरकार हवाई अड्डे से हवाई सम्पर्क बढ़ाने हर संभव सहयोग देने तैयार है।
