इंजीनियर-ठेकेदार गठजोड़ की निरंकुशता को लेकर परिषद में हंगामा

सतना: नगर निगम के सामान्य सम्मिलन में प्रस्तुत सभी एजेंडों को पार्षदों ने इस शर्त पर सर्व सम्मति से मंजूरी दे दी कि नगर के विकास और समस्यायों पर गंभीरता से चर्चा हो सके. सदन की मंजूरी मिलने पर आरंभ हुई चर्चा में नगर निगम के इंजीनियर और ठेकेदारों के गठजोड़ के चलते निरंकुश कार्यशैली का मुद्दा छाया रहा. आलम यह रहा कि इस मामले में एक ओर जहां पक्ष-विपक्ष के पार्षद एकमत नजर आए वहीं दूसरी ओर महापौर ने भी कार्य में हुई लापरवाही को स्वीकार करने में गुरेज नहीं किया.

शुक्रवार को नगर निगम सभागार में आयोजित सामान्य सम्मिलन में पहला एजेंडा सामने आते ही पार्षदों ने कहा कि सभी एजेंडों को सर्वसम्मति से पास कर दिया जाए. लेकिन शहर के विकास और समस्यायों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा अवश्य की जाए. पार्षदों को एकमत देख परिषद अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी द्वारा सभी एजेंडों को सर्व सम्मति से स्वीकृति प्रदान कर दी गई. जिसके बाद शुरु हुई चर्चा में पार्षदों द्वारा अपने-अपने वार्ड से संबंधित समस्या और कार्य अवरुद्ध होने के मामलों को उठाया जाने लगा.

नाली-नाले, सडक़ निर्माण, सीवर लाइन का रेस्टोरेशन के रुके कार्य, पार्क से लेकर प्रमुख मार्गों में प्रकाश व्यवस्था का आभाव, और कचरा उठाव जैसे मामले में चली आ रही समस्या को पार्षदों ने जोर-शोर से उठाया. पार्षदों का कहना था कि साल भर पहले जिन कार्यों की फाइन बनी थी उन्हें बजट में कमी का बहाना बनाते हुए इंजीनियरों द्वारा रोक दिया जाता है. अब उनके कार्यकाल का डेढ़ साल ही बचा है.

यदि वे कोई कार्य नहीं करा पाते हैं तो फिर आमजन के सामने क्या मुंह लेकर जाएंगे. सभी पार्षद अपने-अपने वार्ड के रहवासियों के प्रति सीधे तौर पर जवाबदेह होते हैं. कार्य नहीं होने पर वार्ड वासियों की खरी-खोटी उन्हें ही सुननी पड़ती है. लेकिन ननि में पदस्थ इंजीनियर किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हैं. पार्षदों ने कहा कि वास्तविकता यह है कि ननि के इंजीनियर और ठेकेदारों का मजबूत गठजोड़ निरंकुशता की सारी हदें पार करता जा रहा है. नगर निगम में जनप्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं होती है. आलम यह रहा कि इसी कड़ी में वार्ड इंजीनियर की निरंकुशता से क्षुब्ध होकर वार्ड 33 के पार्षद संजू यादव ने उन्हें वहां से स्थानांतरित करने की मांग कर दी.

पार्षद की मांग को देखते हुए निगमायुक्त द्वारा वार्ड इंजीनियर को शो कॉज जारी कर जवाब मांगने का आश्वासन दिया गया. इसी तरह की तीखी नोक-झोंंक तब भी सामने आई जब नेता प्रतिपक्ष मिथलेश सिंह ने ननि की विद्युत शाखा प्रभारी इंजीनियर क्षिप्रा सिंह पर पार्षदों को गलत जानकारी देने के गंभीर आरोप लगाए. चर्चा के दौरान यह स्पष्ट भी हुआ कि इंजीनियर द्वारा नेता प्रतिपक्ष को गलत जानकारी दी गई थी. लिहाजा इस मामले में भी निर्धारित प्रक्रिया का हवाला देते हुए सदन द्वारा शो-कॉज जारी कर जवाब मांगे जाने के निर्देश दे दिए दिए गए.
 प्रकाश व्यवस्था खस्ताहाल
पक्ष-विपक्ष, सभी पार्षदों ने एक सुर में सदन में यह समस्या उठाई कि शहर में प्रकाश व्यवस्था खस्ताहाल हो चुकी है. मेंटिनेंस करने वाले दोनों ठेकेदारों के पास न तो उपकरण होते हैं और न ही लाइटें. ऐसे में यदि एक स्थान की लाइट किसी तरह बन भी जाती है तो अगले 5 स्थानों की लाइट खराब हो जाती है. यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है और पार्क, गलियां सहित प्रमुख मार्ग अंधेरे में डूबे रहते हैं. इस संबंध में यदि ननि और स्मार्ट सिटी के इंजीनियरों से शिकायत की जाती है तो वे जवाब देना तक जरुरी नहीं समझते. बिना लिफ्टर मशीन के ही ठेकेदार को टेंडर दे दिया गया और अब उनके द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे लाखों के बिल बिना किसी पूछ-परख के पास करते जा रहे हैं. कांग्रेस पार्षद अमित अवस्थी और नेता प्रतिपक्ष मिथिलेश सिंह ने तो गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ननि के इंजीनियरों की कार्यशैली इसी बात से समझी जा सकती है कि पूर्व अधिकारी की ठेकेदारों के साथ पार्टनरशिप थी.
 दबाव देकर समाप्त की जांच
शहर में खस्तहाल होती जा रही प्रकाश व्यवस्था को लेकर लंबे समय से आवाज उठाते आ रहे वार्ड क्र. 20 के पार्षद मनीष टेकवानी ने सदन में चौथी बार इस समस्या को उठाने के साथ ही गंभीर आरोप लगाए. विद्युत लाइटों की गुणवत्ता को लेकर उनके द्वारा की गई शिकायत के मद्देनजर सदन द्वारा जांच समिति बनाई गई थी. मनीष के अनुसार जांच के दौरान ननि के इंजीनियरों द्वारा न सिर्फ ठेकेदार का अंधा समर्थन किया गया बल्कि उन्हें डरा-धमकाकर और दबाव देकर जांच को समाप्त करा दिया गया.

यदि केवल दिखाने के लिए ही जांच समिति बनाई जाती है तो फिर उसका क्या मतलब है. यह सुनकर पार्षद अमित अवस्थी ने कहा कि पार्षद को धमकाए जाने की घटना गंभीर विषय है, लिहाजा जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए. इसी कड़ी में यही आरोप भी सामने आए कि ननि की विद्युत प्रभारी क्षिप्रा सिंह और स्मार्ट सिटी के इंजीनियर मामले को एक दूसरे पर टालते हुए समूची समस्यायों से पल्ला झाड़ लेते हैं.
 महापौर ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम
शहर की खस्तहाल होती जा रही प्रकाश व्यवस्था के संबंध में पक्ष-विपक्ष के पार्षदों द्वारा की गई चर्चा को सुनने के बाद महापौर योगेश ताम्रकार सहजता के साथ स्वीकार करते हुए कहा कि लाइट मेंटिनेंस के कार्य में लापरवाही हुई है इसमें कोई दो राय नहीं है. पहला तो मेंटिनेंस टीम के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं हैं और दूसरा उनके पास लाइट-उपकरण का स्टॉक भी नहीं होता. यह दोनों एजेंसियों की शुद्ध लापरवाही है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए.

दोनों एजेंसियों को 15 दिन का चेतावनी पत्र जारी किया जाए और यदि इस अवधि में शहर के सभी 45 वार्डों की प्रकाश व्यवस्था नहीं सुधरी तो विशेष सम्मिलन बुलाकर उनका टेंडर टर्मिनेट कर दिया जाए. ननि की विद्युत प्रभारी क्षिप्रा और स्मार्ट सिटी के इंजीनियर अबोध दोनों मिलकर इस संबंध में आवश्यक चर्चा कर लें, जिसकेे  बाद आगे की कार्रवाई शुरु हो सके. इसी कड़ी में महापौर द्वारा यह कड़ी ताकीद भी की गई कि ठेकेदारों को नगर निगम द्वारा किसी भी तरह की मशीन अथवा संसाधन उपलब्ध नहीं कराया जाए.

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