मोंथा ने आंध्र प्रदेश के सात जिलों में मचायी भारी तबाही, दो की मौत, पांच लाख एकड़ की फसल बर्बाद

विजयवाड़ा, (वार्ता) चक्रवाती तूफान मोन्था ने आंध्र प्रदेश के सात जिलों में भारी तबाही मचाई है। इसके कारण पाँच लाख एकड़ से ज़्यादा की फसलें बर्बाद हो गई हैं और दो लोगों की मौत हुयी है। सैकड़ों गाँवों का सड़कों के जलमग्न होने से संपर्क से कट गए हैं। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने स्थिति का जायज़ा लेने के लिए हवाई सर्वेक्षण किया। मंगलवार देर रात कोनासीमा ज़िले में पहुँचे इस चक्रवाती तूफान ने पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, कृष्णा, गुंटूर, प्रकाशम और नेल्लोर ज़िलों में धान, पपीता, केला, कपास, मक्का और मिर्च की फसलों को नुकसान पहुँचाया है। कोनासीमा ज़िले में सैकड़ों नारियल के पेड़ भी उखड़ गए। इन ज़िलों में सैकड़ों एकड़ में लगी सब्ज़ियों की फ़सलें बारिश के पानी में डूब गयी हैं।

मोंथा ने सबसे ज्यादा धान की खेती करने वाले किसानों को नुकसान पहुंचाया है। नवंबर महीने में काटी जाने वाली धान की फसल चार लाख एकड़ से अधिक में की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी। किसानों ने मीडियाकर्मियों को बताया कि उन्होंने प्रत्येक एकड़ में धान की फसल उगाने के लिए लगभग 40,000 से 50,000 रुपये का निवेश किया था, लेकिन पूरी फसल बर्बाद हो गयी। सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें कोशिश कर रही हैं। कोनासीमा जिले के ममिडिकुदुरु गांव में एक 42 वर्षीय महिला की पल्मायरा का पेड़ गिरने मौत हो गयी। शोक संतप्त परिवार के लिए पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की गयी है। दूसरी मौत के बारे में विवरण उपलब्ध नहीं था। जिलों में कई जगहों पर केले और पपीते के पौधे जमीन पर गिरते देखे गए। कृष्णा जिले के थोटलवल्लुरु में किसानों के एक समूह ने कहा कि उन्होंने प्रत्येक एकड़ में केले की फसल उगाने के लिए 1.40 लाख रुपये का निवेश किया था। मोंथा के कारण 300 से ज़्यादा बिजली के खंभे उखड़ गए जिससे कई गाँवों में बिजली गुल हो गई और 54 सब-स्टेशनों के ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हो गए। सात ज़िलों में 500 से ज़्यादा विशाल पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए जिससे यातायात बाधित हो गया। पूरा ओंगोल शहर जलमग्न हो गया और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मछलीपट्टनम, रेपल्ली, नंद्याला, ओंगोल और अमलापुरम के बस स्टेशनों पर तीन से पाँच फीट पानी भर गया। ज़िलों में कई नहरें टूट गईं। सौ से ज़्यादा गाँवों का सड़क संपर्क टूट गया है। कृषि मंत्री के. अत्चन्नायडू ने कोनासीमा जिले में क्षतिग्रस्त फसलों का निरीक्षण किया। उन्होंने अमलापुरम में मीडिया को बताया कि मोन्था चक्रवात का प्रभाव अपेक्षा से कम रहा। उन्होंने कहा, “आश्चर्यजनक रूप से, कोनासीमा जिले में, जहाँ चक्रवात ने दस्तक दी थी, अपेक्षा से कम तबाही हुई है। प्रकाशम और नेल्लोर जिलों में भारी बारिश ने ऐसी तबाही मचाई जिसकी उम्मीद नहीं थी।” कृषि मंत्री ने लाखों एकड़ में फसलों के नुकसान पर दुख व्यक्त किया और किसानों को हर संभव आर्थिक मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि फसल के नुकसान आकलन शीघ्रता से किया जाएगा। साथ ही मुआवजे का भुगतान भी किया जाएगा।

 

 

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