
राजगढ़। नगर के सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार को सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम आयोजित किया गया. मुख्य वक्ता सप्तशक्ति संगम की प्रांत संयोजिका नीता गोस्वामी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को दिशा देने और संस्कारयुक्त पीढ़ी तैयार करने के लिए संयुक्त परिवार प्रणाली को पुनर्जीवित करना अत्यंत आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में परिवारों की आत्मा खोती जा रही है. आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार, प्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है. भारतीय संस्कृति में स्त्री को परिवार और समाज की धुरी कहा गया है. वह परिवार को जोडऩे, संस्कार देने और जीवन को दिशा दिखाने की शक्ति रखती है.
उन्होंने मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे किसी भी परिस्थिति में परिवार को टूटने न दें, बल्कि सबको जोडऩे का प्रयास करें. संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति की जड़ है. पहले एक ही छत के नीचे तीन-चार पीढिय़ां साथ रहती थी. जहां बच्चों को बड़ों से स्नेह, अनुशासन और जीवन मूल्य सीखने को मिलते थे.
संयुक्त परिवार प्रणाली की ओर लौटे
अब एकल परिवार की प्रवृत्ति ने आत्म केंद्रित जीवनशैली को बढ़ावा दिया है. जिससे परिवार और समाज दोनों में दूरी बढ़ी है. अत: अब समय आ गया है कि हम फिर से संयुक्त परिवार प्रणाली की ओर लौटे. उन्होंने कहा कि जब परिवार का हर सदस्य शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर ध्यान देगा तभी परिवार सुखी और समृद्ध बनेगा. परिवार खुशहाल होंगे तभी राष्ट्र भी सशक्त और विकसित होगा. कार्यक्रम में मातृशक्ति से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया. कहा कि प्रत्येक नागरिक को प्लास्टिक मुक्त समाज, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में योगदान देना चाहिए.
रामायण और महाभारत से संबंधित प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भारतीय संस्कृति के गहन ज्ञान का परिचय दिया.
इस अवसर पर विद्या भारती की प्रांत कार्यकारिणी सदस्य रश्मि रघुवंशी, उमा सक्सेना, हेमलता साहू, प्रीति गौतम सहित मातृशक्ति उपस्थित रही.
