सीहोर। सरकार ने इस बार किसानों को भावांतर योजना का फायदा देते हुए उन्हें मंडी में सोयाबीन बेचने पर मॉडल रेट के अनुसार नुकसान की भरपाई करने की बात कही है. शुक्रवार से इस योजना में मंडी में खरीदी शुरू होगी. इसके लिए 65 हजार 649 किसानों ने पंजीयन कराया है जबकि पिछले साल इनकी संख्या 26600 थी. इस तरह से पिछले साल की तुलना में ये 39 हजार 49 किसान अधिक हैं.
इस बार सरकार ने सोयाबीन की खरीदी के लिए समर्थन की जगह भावांतर योजना लागू की है. इसका फायदा किसानों को दिया जाएगा. 7 अक्टूबर पंजीयन की आखिरी तारीख थी. इस समय अवधि तक जिले के 65649 किसानों ने पंजीयन कराया है जबकि पिछले साल इन किसानों की संख्या केवल 26600 थी. यानि इस बार 39 हजार अधिक किसानों ने इस योजना में सोयाबीन विक्रय करने का मन बनाया है. इसी तरह इस बार 1 लाख 52 हजार 346 हेक्टेयर पंजीकृत रकबा हुआ है.
जिले की 8 कृषि उपज मंडियों में शुक्रवार से भावांतर योजना के तहत सोयाबीन की खरीदी का काम शुरू हो जाएगा. इनमें सीहोर और आष्टा मंडियां बड़ी हैं जहां सबसे अधिक किसान आएंगे. भावांतर योजना में किसानों को जो फायदा मिलेगा वह मॉडल रेट से ही तय होगा। मॉडल रेट तय करने के लिए 15वें दिन का रेट लिया जाएगा। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अशोक कुमार उपाध्याय ने बताया कि हर 15वें दिन मंडी में खरीदी का मॉडल रेट देखा जाएगा, उसी के हिसाब से भावांतर तय होगा. इस साल बारिश से सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने अरली वैरायटी किस्में बोई थीं उनकी फसलें अब पककर तैयार हो गई थीं। इसी बीच कई जगह तो किसानों ने सोयाबीन की कटाई का काम भी शुरू कर दिया था. तेज बारिश से खेतों में एक से दो फीट तक पानी भर गया था जिससे सोयाबीन की फसल चौपट हो गई थी. पहले पीला मौजेक और अब बारिश से फसल बर्बाद. किसानों का कहना है कि पहले पीला मौजेक से खेत पीले पड़ गए थे। जो थोड़ी बहुत फसल बची थी वह बारिश ने खराब कर दी है.
