वाशिंगटन, 23 अक्टूबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर आश्वासन दिया है कि भारत इस वर्ष के अंत तक रूसी तेल आयात को “तेजी से कम” करेगा।
नाटो महासचिव मार्क रटे के साथ व्हाइट हाउस में बोलते हुए, राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि भारत वर्तमान में अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत रूस से प्राप्त करता है, लेकिन उनकी योजना आने वाले महीनों में इसे धीरे-धीरे समाप्त करने की है।
राष्ट्रपति ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, भारत ने मुझसे कहा कि वे इसे रोक देंगे। यह एक प्रक्रिया है; आप इसे तुरंत नहीं रोक सकते। लेकिन साल के अंत तक, यह लगभग शून्य हो जाएगा। यह एक बड़ी बात है।”
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यह कमी धीरे-धीरे होगी ताकि वैश्विक बाजार स्थिर रहे। “भारत का रूख बहुत अच्छा रहा है। मैंने कल प्रधानमंत्री मोदी से बात की, और वे पूरी तरह से शानदार रहे हैं।”
राष्ट्रपति ट्रम्प की टिप्पणी कुछ दिनों बाद आई है, जब उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि नयी दिल्ली रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा। उन्होंने भारत की ऊर्जा नीति को संभावित अमेरिकी टैरिफ से भी जोड़ा, चेतावनी दी कि भारतीय सामानों पर उच्च आयात शुल्क तब तक लागू रहेंगे जब तक देश मॉस्को से तेल खरीदना बंद नहीं करता।
श्री ट्रम्प ने इससे पहले एयर फोर्स वन पर बातचीत के दौरान कहा, “अगर वे ऐसा कहना चाहते हैं, तो उन्हें भारी आयात शुल्क का भुगतान जारी रखना होगा-और वे ऐसा नहीं करना चाहते।”
अमेरिका ने पहले ही कुछ भारतीय आयातों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जिनमें से 25 प्रतिशत नयी दिल्ली के रूसी कच्चे तेल आयात के कारण है।
अमेरिकी नेता ने कहा कि वह चीन के रूसी ऊर्जा और तेल व्यापार के बारे में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चर्चा करने की योजना बना रहे हैं, ताकि मॉस्को पर शांति समझौते के लिए बातचीत करने का दबाव डाला जा सके। ट्रम्प ने अपने पूर्ववर्तियों, श्री जो बाइडन और श्री बराक ओबामा की भी आलोचना की, उनकी नीतियों को चीन और रूस को करीब लाने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, “चीन थोड़ा अलग है। उनका रूस के साथ थोड़ा अलग रिश्ता है। यह कभी अच्छा नहीं था, लेकिन बाइडन और ओबामा की वजह से, उन्हें एक साथ मजबूर किया गया। उन्हें कभी एक साथ नहीं होना चाहिए था… वे (चीन-रूस) दोस्ताना नहीं हो सकते… मुझे उम्मीद है कि वे दोस्ताना हैं, लेकिन वे नहीं हो सकते।”
अमेरिकी नेता ने कहा कि वह बीजिंग के रूसी ऊर्जा और तेल व्यापार के बारे में श्री जिनपिंग से चर्चा करने की योजना बना रहे हैं, ताकि मॉस्को पर शांति समझौते के लिए बातचीत करने का दबाव डाला जा सके।

