मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
अंचल में कांग्रेस दो ध्रुवीय हो गई है. कांग्रेस ने यहां से जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष और उमंग सिंघार को विधान सभा नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेवारी सौंप रखी है. देखने में तो आता है कि पटवारी -सिंघार मिलकर पार्टी को मजबूत बनाने में जुटे हैं, पर ऐसा नहीं है. जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने के बाद सिंघार समर्थकों को महत्व न मिलने से सिंघार के मन में खटास है. जब से पटवारी ने राज्य कांग्रेस का पुनर्गठन किया है, सिंघार के लोगों को बमुश्किल कोई पद मिला है. जिलाध्यक्ष नियुक्तियों में भी ऐसा ही रहा. यही कारण है कि अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए वे अन्य सामाजिक संगठन के माध्यम से अपनी राजनीतिक मजबूती में लगे हैं.
मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद के मुखिया के नाते सिंघार ने जब-तब जीतू पटवारी को आइना भी दिखाया है. अंचल के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उन्होंने तगड़ी फिल्डिंग कर रखी है, ताकि पार्टी का कोई अन्य नेता उनके इशारे के बिना सफल कार्यक्रम न कर सके. इसकी बानगी सिंघार के निकटस्थ आलीराजपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष महेश पटेल की कुछ माह पूर्व जीतू पटवारी को दी गई खुली चेतावनी थी.
पटेल परिषद के उपाध्यक्ष हैं. झाबुआ-आलीराजपुर में आदिवासियों की जमीन से बेदखली के विरूद्ध पटेल के आंदोलन की पटवारी ने पार्टी के एजेंडे से बाहर बता खिलाफत की थी. इससे नाराज पटेल ने पार्टी कार्यक्रम के मंच से पटवारी को ललकारा था कि वे हमारे क्षेत्र में एक कार्यक्रम भी कर के दिखा दें. साथ ही उन्होंने कहा था उमंग सिंघार के अलावा वे किसी का कार्यक्रम नहीं होने देंगे. सिंघार आदिवासी विकास परिषद के माध्यम से पटवारी ही नहीं कांतिलाल-विक्रांत भूरिया को भी टक्कर दे रहे हैं.
सिंघार की उपेक्षा
उमंग सिंघार के आदिवासी हिंदू नहीं बयान से उपजे विरोध के बाद से सिंघार को उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है. आदिवासियों को सनातन से अलग-थलग करने की नीति उन्हें पार्टी में ही भारी पड़ रही है. हाल ही में धार में जय ओंकार भिलाला समाज के प्रांतीय सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पहुंच रहे थे. इस कार्यक्रम की उमंग सिंगार ने आदिवासियों को भील-भीलाला में बांटने की साजिश करार देते हुए कड़ी आलोचना के साथ लोगों से कार्यक्रम से दूरी बनाने की अपील की थी. यहां मुख्यमंत्री पहुंचे और सिंघार की अपील को नजरअंदाज कर लोगों का हुजुम भी आया.
इतना ही नहीं सम्मेलन में क्षेत्र के कांग्रेसी जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ मंच भी साझा किया. धार के किला मैदान पर आयोजित इस कार्यक्रम में कुक्षी के कांग्रेस के विधायक सुरेन्द्र सिंह बघेल हनी, भीकनगांव की कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी और बड़वानी के कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई शिरकत करने वालों में प्रमुख थे. अब अपनी बात की अनसुनी से सिंघार मुंह फुलाए बैठे हैं
सकते में आम आदमी पार्टी
मालवा-निमाड़ की राजनीति में भाजपा-कांग्रेस की सशक्त भूमिका के बीच यहां सियासी जड़ें जमाने में लगी आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष नरेश गंगे आपसी खींचतान का शिकार हो गए. पार्टी द्वारा बिना नोटिस दिए निष्कासित करने के विरोध में उज्जैन जिले में बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया. समभाव की बात करने वाली आप पार्टी के पदाधिकारियों पर जातिगत भेदभाव के आरोप लगे हैं. बताया जा रहा है कि नरेश गंगे का निष्कासन इसी भेदभाव का उदाहरण है. पार्टी के पूर्व घट्टिया विस प्रभारी उमेश गुजराती गंगे के पक्ष में खड़े हो गए हैं और जातिगत भेदभाव करने वाले पदाधिकारी को निलंबित करने के लिए अड़ गए है. फिलहाल पार्टी में सिर-फुटव्वलल जारी है और पार्टी कर्ता-धर्ता एक साथ डेढ़ सौ से उपर हुए इस्तीफे से सकते में है.
