रायसेन: जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर परवलिया गांव में स्थित माता हरसिद्धि का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है। यहां हर नवरात्रि पर लाखों भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भोर से ही भक्तों की लंबी कतार लग जाती है, ताकि वे माता के दर्शन कर अपने मन की इच्छा पूर्ति की कामना कर सकें।
मां हरसिद्धि का यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में शामिल है।
स्थानीय मान्यता है कि यहां सच्चे मन और साफ नीयत से पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इतिहास के अनुसार, सम्राट विक्रमादित्य ने मां हरसिद्धि की तपस्या की और उन्हें उत्तराखंड से उज्जैन ले जाने की प्रार्थना की। यात्रा के दौरान मां की गाड़ी का पहिया टूट गया, इसलिए उन्हें परवलिया गांव में उतारना पड़ा। तभी से उनके चरणों की पूजा यहीं होती है। उनके धड़ की पूजा भोपाल जिले के बैरसिया के ग्राम तरावली में और मस्तक की पूजा उज्जैन में होती है।
मंदिर में साल में एक बार विशाल मेला भी लगता है। पुजारी राज दीक्षित के अनुसार, महिलाएं अपनी सूनी गोद भरने की मनोकामना लेकर आती हैं और मां के आशीर्वाद से उनकी गोद भर जाती है। कहा जाता है कि यहां वर्षों पुराने बिगड़े काम भी बन जाते हैं और सच्चे मन से मां से जो भी मांगो, वह पूरा होता है।
मां हरसिद्धि ने राजा विक्रमादित्य से कहा था कि मैं वहीं रुकूंगी जहां मुझे रुकना होगा, और तब से उनकी पूजा इसी स्थान पर होती रही है।
