सेबी के एनओसी के बाद आठ-नौ महीने में आएगा एनएसई का आईपीओ

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (वार्ता) पूंजी बाजार नियामक सेबी से हरी झंडी मिलने के बाद भी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आईपीओ में आठ से नौ महीने का समय लग सकता है।
एनएसई के प्रबंध निदेशक आशीष चौहान ने बुधवार देर रात यहां एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से यह बात कही। उन्होंने कहा कि एनएसई ने सेबी के पास सेटलमेंट के लिए जून 2025 में आवेदन किया था। सेबी से एनओसी मिलने के बाद चार से पांच महीने में आरएचपी तैयार हो जायेगा। आरएचपी जमा कराने के बाद आईपीओ के लिए मंजूरी मिलने में चार से पांच महीने का और समय लग सकता है। एनओसी मिलने के बाद करीब आठ से नौ महीने में एनएसई का आईपीओ बाजार में आ जायेगा।
श्री चौहान ने एक सवाल के जवाब में बताया कि ऑप्शन और फ्यूचर ट्रेडिंग के तरीकों और नियमन में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। कुछ ऐसे आंकड़े मिले हैं जो यह बताते हैं कि आम लोग इनमें अपना धन गंवा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “जहां पर एक तरह से लोग अपना पैसा गंवाते हैं, खासकर विकासशील अर्थव्यवस्था में हम इस तरह का जोखिम नहीं ले सकते कि लोगों के घर तक बिक जाएं, इस पर नियंत्रण होना जरूरी है। लेकिन यह भी सही है कि यदि आप इन इंस्ट्रूमेंट को अच्छी तरह से जानते हैं तो आपको उनका इस्तेमाल करने की इजाजत मिलनी चाहिए।
ऑप्शन और फीचर ट्रेडिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध के सुझाव को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि घर में हम सदियों से चाकू का इस्तेमाल करते हैं यह जानते हुए भी कि उससे किसी को नुकसान पहुंच सकता है। यह मां की जिम्मेदारी होती है कि वह चाकू को बच्चों से दूर रखें। इसी तरह हमें इस पर विचार करने की जरूरत है कि कौन इसका इस्तेमाल कर सकता है और कौन नहीं?

भारतीय पूंजी बाजार में पिछले कुछ सालों में आई तेजी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा पूंजी बाजार लोगों से बना है। विकासशील देशों में इस स्तर का पूंजी बाजार सिर्फ चीन में देखने को मिलता है जहां प्रति व्यक्ति आय 18,000 डॉलर है जबकि भारत में महज 3,000 डॉलर है। उन्होंने कहा कि 3,000 प्रति व्यक्ति आय वाले देश में 5.2 लाख करोड़ डॉलर का शेयर बाजार किसी भी किताब या किसी भी सिद्धांत की व्याख्या से परे है।
एनएसई के संस्थापकों में से एक श्री चौहान ने कहा कि 1994 में जब इस शेयर बाजार की स्थापना हुई थी तो उस समय देश में सिर्फ 10 लाख निवेशक थे जबकि आज 12 करोड़ निवेशक हैं। देश के 20 प्रतिशत परिवार आज शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं। उन्होंने इसका श्रेय तकनीक को देते हुए कहा कि इसकी गति जिस तरह से बढ़ रही है, उसी तरह से पूंजी सृजन की रफ्तार भी बढ़ रही है। जब तक हम प्रौद्योगिकी को नहीं अपनाएंगे तब तक हम आगे नहीं बढ़ सकते। पिछले 1,000 साल में हमने यही गलती की और इसीलिए हम गुलाम हुए।
पूंजी बाजार में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के बारे में पूछे गए एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह धीरे-धीरे हुआ, और फिर अचानक हो गया। उन्होंने कहा कि पहले कुछ लोगों ने शेयर बाजार में निवेश किया और उनके उदाहरण को देखते हुए दूसरे लोगों ने भी निवेश किया। धीरे-धीरे उन्हें पता चला कि बैंक या सोने में निवेश की तुलना में यह ज्यादा रिटर्न देता है। फिर और लोगों ने निवेश करना शुरू किया। इसमें 3जी 4जी डाटा ने इसमें ग्राहकों की मदद की। इसने लोगों को अपने मोबाइल फोन के जरिए शेयर बाजार में निवेश करने में सक्षम बनाया। बाद में कोरोना के समय में लोगों ने ज्यादा निवेश करना शुरू किया क्योंकि उस समय वे खाली बैठे थे।
भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार में भरोसे को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि गरीब आदमी आमतौर पर बचत नहीं करता है। यदि वह थोड़ा-बहुत बचाता भी है तो वह किसी पर विश्वास नहीं करता। लेकिन इस देश के आम लोगों ने उन कंपनियों पर, उन लोगों पर विश्वास जताया है जिन्हें वे सीधे नहीं जानते।
उन्होंने कहा कि दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी वाला हमारा देश विश्वास पर ही चल सकता है ना कि जोर जबरदस्ती से। उन्होंने लोक प्रशासन और लोक सेवा से जुड़े अधिकारियों को भी लोगों में विश्वास बहाली की सलाह दी।

Next Post

फ्यूचर और ऑप्शन में ट्रेडिंग के तरीकों पर पुनर्विचार करेगा एनएसई

Thu Sep 25 , 2025
नयी दिल्ली, 25 सितंबर (वार्ता) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एनएसई के प्रबंध निदेशक आशीष चौहान ने बुधवार को कहा कि ऑप्शन और फ्यूचर ट्रेडिंग के तौर तरीकों पर एक्सचेंज पुनर्विचार कर रहा है। श्री चौहान ने यहां उनके जीवन पर लिखी गई एक किताब के विमोचन के मौके पर यह बात […]

You May Like