जनजातीय कार्य मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र ने युवा विकास के लिए मिलाया हाथ

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (वार्ता) केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र के साथ साझेदारी में सोमवार को आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आदि युवा फैलोशिप और आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव विभु नायर ने इस अभियान के बारे में कहा कि आदि युवा फ़ेलोशिप और आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक कार्यक्रम का शुभारंभ आदिवासी युवाओं को भविष्य के नेता, नवप्रवर्तक और परिवर्तनकारी के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

श्री नायर ने कहा कि कौशल, मार्गदर्शन और जमीनी स्तर पर जुड़ाव को बढ़ावा देकर, यह पहल सुनिश्चित करती है कि आदिवासी समुदाय अपने विकास को आकार देने में सक्रिय भागीदार बनें। भारत में जनजातीय कार्य मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के बीच इस साझेदारी के माध्यम से, यह अभियान समावेशी विकास, सहभागी शासन और विकसित भारत 2047 के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

भारत में संयुक्त राष्ट्र रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, शोम्बी शार्प ने इस कार्यक्रम को लेकर कहा, ” यह साझेदारी आदिवासी युवाओं को अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व करने में सक्षम बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। यह न केवल समावेशी प्रगति को गति देगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि आदिवासी समुदाय भारत की विकास गाथा के केंद्र में हों। मंत्रालय हमारे युवाओं को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे भारत के भविष्य के लिए नेता, नवप्रवर्तक और परिवर्तन के वाहक के रूप में उभरें। ”

आदि कर्मयोगी अभियान का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर को जनजातीय गौरव वर्ष (15 नवंबर 2024 – 15 नवंबर 2025) के एक भाग के रूप में किया था। इसका उद्देश्य 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 550 जिलों के एक लाख आदिवासी बहुल गांवों के 11 करोड़ नागरिकों को सीधे तौर पर जोड़ना है। उत्तरदायी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन के सिद्धांतों पर आधारित, यह अभियान शासन को एक जन आंदोलन में बदलने और विकसित भारत 2047 की नींव रखने का प्रयास करता है।

इस पहल के एक भाग के रूप में, आदि सेवा पर्व (17 सितंबर – दो अक्टूबर 2025) चल रहा है, जिसके दौरान आदिवासी समुदाय और सरकारी अधिकारी मिलकर समावेशी विकास की दिशा में स्थानीय विकास के मार्ग प्रशस्त करने के लिए आदिवासी ग्राम विजन 2030 कार्य योजनायें तैयार करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र भारत द्वारा समर्थित आदि युवा फेलोशिप, अपनी तरह का एक अनूठा कार्यक्रम है, जिसे संरचित शिक्षा, मार्गदर्शन और करियर विकास के माध्यम से आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

चयनित आदिवासी युवा 12 महीने की सशुल्क फेलोशिप लेंगे, जिसमें ज्ञान-निर्माण, कार्यस्थल पर अनुभव और चिंतनशील अभ्यास के बीच संतुलन बनाने वाली एक अनुकूलित शिक्षण योजना शामिल होगी। फेलो को मासिक भत्ते, व्यापक स्वास्थ्य और जीवन बीमा, और उच्च-गुणवत्ता वाले संयुक्त राष्ट्र और वाणिज्यिक शिक्षण प्लेटफार्मों तक पहुंच प्राप्त होगी।

यह कार्यक्रम फेलो को राष्ट्रीय कौशल और रोज़गार योजनाओं जैसे पीएमकेवीवाई 4.0, एनएपीएस और पीएम विकसित भारत रोज़गार योजना से जोड़ेगा, जिससे दीर्घकालिक करियर के रास्ते सुनिश्चित होंगे। फेलो को संरचित मार्गदर्शन, सहकर्मी से सहकर्मी सीखने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों के अनुभव का भी लाभ मिलेगा।

16 फेलो के पहले बैच का चयन अगले महीने एक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा और उन्हें राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ नियुक्त किया जायेगा।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) द्वारा समर्थित आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक पहल, आदिवासी युवाओं को जमीनी स्तर पर बदलाव के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने और आदिवासी क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए सक्षम बनाएगी। इसके तहत आदि कर्मयोगी स्वयंसेवकों के रूप में 82 संयुक्त राष्ट्र सामुदायिक स्वयंसेवकों को दो महीने के गहन जमीनी स्तर के जुड़ाव के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के 13 जिलों के 82 ब्लॉकों में तैनात किया गया है।

स्वयंसेवक ग्राम विज़न 2030 की योजना, जागरूकता अभियान, आउटरीच और योजनाओं एवं सेवाओं तक बेहतर पहुंच में सहयोग करेंगे। उनका योगदान ग्राम स्तर पर सामुदायिक भागीदारी और समावेशी शासन को मज़बूत करेगा।

 

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