नयी दिल्ली 22 सितम्बर (वार्ता) विदेश मंत्री डा.एस.जयशंकर ने दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के नौसैनिक पोतों की हाल ही में हुई झड़प के बीच रविवार को न्यूयार्क में फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा पी. लाज़ारो के साथ मुलाकात की और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में परस्पर सहयोग पर चर्चा की। डा.जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में में भाग लेने के लिए अभी न्यूयॉर्क में हैं।
मुलाकात के बाद डा.जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों पक्षों ने अगस्त में फिलीपींस के राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस की भारत की राजकीय यात्रा के परिप्रेक्ष्य में बातचीत की। उस समय दोनों पक्षों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था।
उन्होंने पोस्ट में लिखा, ” न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की शुरुआत में फिलीपींस की विदेश मंत्री लाज़ारो से मिलकर खुशी हुई। हमने राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर.मार्कोस जूनियर की हाल की भारत राजकीय यात्रा पर भी बातचीत की। संयुक्त राष्ट्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारे सहयोग पर भी बात हुई। ”
फिलीपींस की विदेश मंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने राजनीतिक, रक्षा, सुरक्षा और समुद्री क्षेत्रों में सहयोग विकसित करने की दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
उन्होंने कहा , ” पिछले अगस्त में राष्ट्रपति की भारत की सफल राजकीय यात्रा के बाद डॉ. एस. जयशंकर से फिर मिलकर खुशी हुई। आज की हमारी चर्चा, राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र में सक्रिय रूप से सहयोग विकसित करने के लिए रणनीतिक साझेदार के रूप में हमारे दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।”
दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत संसाधन संपन्न दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल को लेकर फिलीपींस और चीन के बीच चल रहे विवाद के बीच हुई है। स्कारबोरो शोल फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में स्थित मछली पकड़ने का पारंपरिक क्षेत्र है जिस पर बीजिंग ने अपना आधिपत्य जमा रखा है। इसका फिलिपीन्स के मछुआरों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
स्कारबोरो शोल फिलीपींस के संयुक्त राष्ट्र द्वारा परिभाषित विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित है और चीन दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से को अपने ऐतिहासिक समुद्री क्षेत्र के रूप में दावा करता है। यह कदम हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के 2016 के उस फैसले की अनदेखी करता है जिसमें इस दावे को खारिज किया गया था।
दोनों देशों के बीच 16 सितंबर को हुई यह झड़प चीन द्वारा स्कारबोरो शोल पर एक प्राकृतिक अभ्यारण्य बनाने की घोषणा के लगभग एक सप्ताह बाद हुई। फिलीपींस ने इस कदम की ‘कब्ज़े का स्पष्ट बहाना’ बताते हुए निंदा की है और पिछले सप्ताह आसियान समुद्री मंच पर भी इसका विरोध किया था।
अगस्त में राष्ट्रपति मार्कोस की भारत यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। फिलीपींस समुद्री सहयोग, रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के साथ और अधिक निकटता से जुड़ने का इच्छुक रहा है। उनकी यात्रा के दौरान, भारतीय नौसेना ने दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में फिलीपींस की नौसेना के साथ अपना पहला संयुक्त समुद्री अभ्यास किया जिस पर चीन ने आपत्ति जताई थी।
फिलीपींस और चीन दक्षिण चीन सागर में एक अन्य स्थल जिसे सेकेंड थॉमस शोल कहा जाता है – स्प्रैटली द्वीप समूह में स्थित एक जलमग्न रीफ को लेकर भी प्रतिस्पर्धा में उलझे हुए हैं। फिलीपींस ने पहली बार 1999 में इस स्थल पर कब्ज़ा किया था और वहाँ एक नौसैनिक पोत तैनात किया है।

