ट्रम्प ने नियोक्ताओं के लिए एच-1बी वीज़ा शुल्क बढ़ाकर एक लाख डॉलर करने संबंधी घोषणा पर किये हस्ताक्षर

वाशिंगटन, 20 सितंबर (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत कंपनियों द्वारा एच-1बी आवेदकों को प्रायोजित करने के लिए भुगतान की जाने वाली राशि को बढ़ाकर एक लाख अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है।

 

उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका उन उच्च कुशल प्रतिभाओं को लाए जिनकी जगह अमेरिकी कर्मचारी नहीं ले सकते।

 

घोषणा में कहा गया है, “कार्यक्रम के व्यवस्थित दुरुपयोग के माध्यम से अमेरिकी कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर प्रतिस्थापन ने हमारी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों को कमजोर किया है।”

 

इस आदेश के अनुसार विशेष व्यवसायों में काम करने के लिए एच-1बी वीज़ा धारक विदेशी नागरिकों का अमेरिका में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा, सिवाय उन आवेदकों के जिनकी याचिकाओं में उनके नियोक्ता द्वारा छह अंकों का भुगतान शामिल है। यह प्रवेश प्रतिबंध उन विदेशी नागरिकों पर लागू होगा जो घोषणा की तिथि, 21 सितंबर के बाद अमेरिका में प्रवेश कर रहे हैं या प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं।

 

कंपनियाँ आमतौर पर एच-1बी वीज़ा के लिए कई हज़ार डॉलर का भुगतान करती हैं।

 

इस नवीनतम नीति से कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करने की लागत में भारी वृद्धि होगी। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं के आंकड़ों के अनुसार, नए एच-1बी वीज़ा के लिए वार्षिक सीमा 85,000 है।

 

शुक्रवार दोपहर व्हाइट हाउस में घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करते हुए, ट्रंप ने कहा कि कंपनियां नया शुल्क नहीं देना चाहेंगी और अमेरिकियों को नियुक्त करने से यह संभव हो जाएगा।

 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ” यह अमेरिकियों को नियुक्त करने के लिए एक प्रोत्साहन है।”

 

इस अवसर पर उपस्थित अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा, “कंपनी को यह तय करना होगा कि क्या वह व्यक्ति इतना मूल्यवान है कि वह सरकार को सालाना एक लाख डॉलर का भुगतान कर सके? या उन्हें स्वदेश जाकर किसी अमेरिकी को नियुक्त करना चाहिए?”

 

अमेरिकी मीडिया ने कहा कि यह भारी शुल्क अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी तकनीकी दिग्गजों को प्रभावित करेगा, जो लंबे समय से सॉफ्टवेयर डेवलपर्स सहित विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम पर निर्भर हैं।

 

सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसार यह योजना अमेरिकी कंपनियों को खासकर अनुसंधान और विकास जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में, विदेशों में नौकरियां स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित करके, उलटा असर डाल सकती है। इससे अंतर्राष्ट्रीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई करने से और भी हतोत्साहित हो सकते हैं।

Next Post

चार सूने घरों में चोरों का धावा, लाखों की चोरी

Sat Sep 20 , 2025
जबलपुर: शहर में बेखौफ चोरों ने चार सूने घरों में धावा बोलते हुए सोने चांदी के जेवरात, नगदी समेत लाखों का माल पार कर दिया। ये वारदातें संजीवनी नगर, गोहलपुर, अधारताल थाना क्षेत्र में हुई है। पुलिस ने चारों ही मामलों में अज्ञात चोरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया […]

You May Like

मनोरंजन

एस. एस.राजामौली ने महेश बाबू की फिल्म वाराणसी के लिए हैदराबाद में बनाया आलीशान सेट मुंबई, 25 मार्च (वार्ता) फिल्मकार एस. एस. राजामौली ने अपनी आने वाली फिल्म ‘वाराणसी’ के लिए हैदराबाद में आलीशान सेट बनाया है। फिल्म वाराणसी में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनस और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिकाओं में हैं।अभी इस फिल्म का प्रोडक्शन चल रहा है और यह हैदराबाद में लगाए गए शानदार सेटों के लिए खूब सुर्खियां बटोर रही है, जहाँ बड़े पैमाने पर वाराणसी की झलक को फिर से बनाया गया है। प्रतिष्ठित मंदिरों और आलीशान महलों के डिजाइन से लेकर बारीक से बारीक बनावट तक, ये सेट वाराणसी से इतने मिलते-जुलते हैं कि कोई भी यह महसूस किए बिना नहीं रह सकता कि वे साक्षात उसी पवित्र शहर के बीचों-बीच खड़े हैं। घाटों, मंदिरों और वहाँ के माहौल को इतनी बारीकी से डिजाइन किया गया है कि वाराणसी की रूह को पूरी तरह से उसमें उतारा जा सके, जिससे ये सेट एकदम असली नजर आ रहे हैं। चर्चा को और बढ़ाते हुए, ‘वाराणसी’ से महेश बाबू का ‘रुद्र’ के रूप में दमदार लुक, पृथ्वीराज सुकुमारन का ‘कुंभा’ के रूप में इंटेंस पहला लुक और प्रियंका चोपड़ा जोनस का ‘मंदाकिनी’ के रूप में रौबदार अवतार पहले ही सामने आ चुका है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है और पूरे देश में एक्साइटमेंट भर दी है। इन शानदार झलकियों ने उम्मीदें बहुत बढ़ा दी हैं, और अब दर्शकों का इंतज़ार सातवें आसमान पर है क्योंकि हर कोई इस भव्य सिनेमाई अनुभव का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है, जो सात अप्रैल, 2027 को बड़े पर्दे पर एक ग्रैंड रिलीज के लिए तैयार है।