भोपाल। मुनि श्री प्रमाणसागर ने कहा कि पुण्य का उपभोग करने से वह समाप्त हो जाता है और पाप का कर्ज बढ़ता है, जिससे जीवन का बंटाढार होता है। यदि बेड़ापार चाहते हो तो पुण्य संचित करो और उसके फल की अपेक्षा मत रखो। उन्होंने कहा कि मंदिर दर्शन, मंत्रजाप, व्रत, उपवास और गुरु उपदेश से पुण्य कमाया जा सकता है। सुख के दिनों में भगवान को याद करने वाला व्यक्ति कभी दुखी नहीं होता। मुनि श्री ने कहा कि पुण्य की क्रियाएं उपादेय हैं, लेकिन फल की चाह छोड़ना ही सच्ची सम्यक दृष्टि है। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि 4 से 12 अक्टूबर तक श्रीसिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन होगा, जिसमें सीमित स्थान के लिए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बुकिंग होगी। रविवार को 1:30 बजे गुरुकुलम् में बृहद क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा।
