काठमांडू, 12 सितंबर (वार्ता) नेपाल में केपी शर्मा ओली सरकार के पतन के बाद उपजे संवैधानिक संकट का हल शुक्रवार तीसरे दिन भी कई दौर की बातचीत के बाद भी नहीं निकल सका।
काठमांडू पोस्ट ने एक्स हैंडल पर कहा है कि राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने जेन-जेड आंदोलनकारियों, सेना और दूसरे अन्य लोगों के साथ बातचीत की है लेकिन वह किसी समाधान पर नहीं पहुंच सके हैं। हालात यह हैं कि अगर जल्द ही कोई हल नहींं निकला तो सेना देश की कमान अपने हाथ में ले सकती है। राष्ट्रपति के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, सेना ने कहा है कि अगर एक नई सरकार का गठन तुरंत नहीं किया जा सकता है और राष्ट्रपति और विरोध प्रदर्शन समूह के बीच बातचीत विफल होती है तो देश में आपातकाल की स्थिति घोषित करने पर भी विचार किया जा सकता है।
राष्ट्रपति भवन (शीतल निवास) के सूत्रों ने कहा है कि राष्ट्रपति संकट को कम करने के लिए जल्द से जल्द एक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अधिकतम प्रयास कर रहे हैं। वह जेन-जेड प्रतिनिधियों की सभी मांगों पर सहमत हैं। राष्ट्रपति पौडेल ने संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 61 (4) का उपयोग करके पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करने और नए मंत्रियों की सिफारिश पर नए चुनावों की घोषणा करने का प्रस्ताव दिया है। राष्ट्रपति ने कहा है कि नए चुनावों की घोषणा के बाद संसद को भंग मान लिया जाएगा।
राष्ट्रपति ने यह प्रस्ताव करने से पहले मौजूदा मुख्य न्यायाधीश, और राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष के साथ परामर्श किया था। अधिकारियों ने कहा है कि उनका सुझाव यह है कि अगर यह इस तरह से चलता है, तो कोई संवैधानिक और कानूनी चुनौती नहीं होगी।
पर इसके दूसरी तरफ राष्ट्रपति के प्रस्ताव को राजनीतिक दलों, सेना और कुछ समूहों ने अस्वीकार कर दिया है।
जेड-जी के एक लोकप्रिय नेता सुदन गुरुंग ने कहा कि वे अभी भी संसद को भंग करने पर अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि अगर संसद को भंग नहीं किया जाता है, तो एक जोखिम है कि पुराना नेतृत्व वापस आ आएगा। प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित न्यायमूर्ति कार्की का मानना है कि सबसे पहले, संसद को भंग कर दिया जाना चाहिए, फिर प्रधानमंत्री को नियुक्त किया जाना चाहिए। नई सरकार चुनाव की घोषणा करेगी और सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगी।
इस गतिरोध को देखते हुए सेना ने राष्ट्रपति को आपातकाल की स्थिति घोषित करने का विकल्प प्रस्तुत किया है, क्योंकि इस तरह का लंबे समय तक बना गतिरोध देश के लिए ठीक नहीं है। एक सैन्य अधिकारी ने कहा, “सेना ने शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाली है। लेकिन अगर ऐसी स्थिति जारी रहती है, तो शांति और सुरक्षा को लंबे समय तक बनाए नहीं रखा जा सकता है।”
उधर कर्फ्यू में ढील दिए जाने से जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। कुछ जगहों पर कर्फ्यू शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक लागू है और इसमें स्थानीय प्रशासन जमीनी स्थिति को देखते हुए ढील देने पर विचार कर रहा है।
