भोपाल: प्रदेश में अवैध खनन के मामलों से जुड़े भाजपा विधायक संजय पाठक के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाई कोर्ट में चल रहे बहुचर्चित प्रकरण के दौरान एक नया मोड़ तब आया, जब यह तथ्य सामने आया कि पाठक के एक रिश्तेदार ने सीधे न्यायाधीश से संपर्क साधने की कोशिश की थी। इस खुलासे के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा ने मामले से स्वयं को अलग कर लिया।
घटना के बाद पाठक की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने न केवल लिखित जानकारी अदालत को दी, बल्कि स्वयं भी मुकदमे से हट गए। इसके अलावा, पाठक और उनकी कंपनियों से जुड़े मामलों की पैरवी कर रहे चार अन्य वकीलों ने भी अपने वकालतनामे वापस ले लिए हैं।
मामला जनवरी 2025 में सामने आया था, जब कटनी निवासी आशुतोष उर्फ मनु दीक्षित ने ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और पैसिफिक एक्सपोर्ट्स द्वारा अवैध खनन के आरोप सही पाए गए। सरकार ने इन पर 443 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका था, जिसके खिलाफ कंपनियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की हुई है।
