सुरक्षा, कनेक्टिविटी और सहयोग के अवसर विकास का मूल मंत्र: एससीओ में मोदी

तियांजिन/नयी दिल्ली 01 सितम्बर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बेठक में सदस्य देशों के बीच सुरक्षा , कनेक्टिविटी और परसपर सहयोग के अवसरों पर जोर देते हुए आतंकवाद का मिलकर मुकाबला करने , संयुक्त राष्ट्र में सुधारों और ग्लोबल साउथ की आवाज को मुखर करने पर बल दिया है।

उन्होंने भारत में विभिन्न स्तर पर सुधारोंं की दिशा में किये जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए सदस्य देशों से भारत की विकास यात्रा से जुड़ने का आह्वान किया।

श्री मोदी ने सदस्य देशों के लोगों के बीच संपर्क को बढावा देने के लिए एससीओ के अंतर्गत एक‘ सांस्कृति संवाद मंच’ बनाये जाने का भी सुझाव दिया।

सात वर्ष के बाद पहली बार चीन यात्रा पर गये श्री मोदी ने सोमवार को यहां एससीओ के राष्ट्र प्रमुखों के 25 वें सम्मेलन को संबोधित किया। अपने संबोधन के शुरू मेंं ही उन्होंने उज़्बेकिस्तान स्वतंत्रता दिवस और किर्गिज़स्तान के राष्ट्रीय दिवस था दोनों देशों के नेताओं को बधाई और शुभकामनाऐं दी।

उन्होंंने कहा कि पिछले चौबीस वर्षों में एससीओ का पूरे यूरेशिया क्षेत्र के ‘विस्तारित परिवार’ को जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने एक सक्रिय सदस्य के रूप में हमेशा संगठन में रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ को लेकर सुरक्षा, कनेक्टिविटी और सहयोग के अवसरोंं को भारत की सोच और नीति तीन मुख्य स्तंभ करार दिया।

पहले स्तंभ सुरक्षा पर बात रखते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा, शांति और स्थिरता किसी भी देश के विकास का आधार होते हैं लेकिन आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद इस राह में बड़ी चुनौतियाँ हैं।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद सिर्फ किसी देश की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक साझा चुनौती है। इसीलिए आतंकवाद से लड़ाई में भारत ने हमेशा एकजुटता पर बल दिया है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत पिछले चार दशकों से निर्मम आतंकवाद का दंश झेल रहा है। उन्होंंने कहा, “ हाल ही में, हमने पहलगाम में आतंकवाद का बहुत ही घिनौना रूप देखा। यह हमला केवल भारत की अंतरात्मा पर ही आघात नहीं था, यह मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश, हर व्यक्ति को खुली चुनौती थी।”

आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों का नाम लिए बिना उन्होंंने इन देशों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा , “ ऐसे में प्रश्न उठना स्वाभाविक है: क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुलेआम समर्थन हमें स्वीकार्य हो सकता है?”

श्री मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपनाने वाले देशों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि

आतंकवाद का विरोध करना सभी का दायित्व है और इस मुद्दे पर दोहरा मापदंड मंजूर नहीं होगा।

उन्होंने कहा,“ हमें स्पष्ट रूप से, और एक स्वर में, कहना होगा कि, आतंकवाद पर कोई भी दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं होगा। हमें मिलकर, आतंकवाद का हर रंग में, हर रूप में, विरोध करना होगा। ये मानवता के प्रति हमारा दायित्व है।”

आतंकवाद के वित्त पोषण के खिलाफ भारत की मुहिम का उल्लेख करते हुए कहा,“ भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकता पर ज़ोर दिया है…भारत ने संयुक्त सूचना अभियान का नेतृत्व करके अल-कायदा और उससे जुड़े आतंकवादी संगठनों से लड़ने की पहल की। हमने कट्टरपंथ के विरुद्ध समन्वय बढ़ाने और मिलकर कदम उठाने का भी प्रस्ताव रखा। हमने आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ आवाज़ उठाई। इसमें आपके सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूँ।”

कनेक्टिविटी पर उन्होंने कहा कि मज़बूत कनेक्टिविटी से केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि विश्वास और विकास के द्वार भी खुलते हैं। उन्होंने कहा ,“ इसी सोच के साथ हम चाबाहार पोर्ट और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे जैसी पहल पर काम कर रहे हैं। इनसे हम अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया के साथ संपर्क बढ़ा सकते हैं। हमारा मानना है कि कनेक्टिविटी के हर प्रयास में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। यही एससीओ चार्टर के मूल सिद्धांतों में भी विधित है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली कनेक्टिविटी में विश्वास और सार्थकता खत्म हो जाती है।

तीसरे स्तंभ सहयोग और सुधार के अवसरों पर उन्होंंने कहा ,“ 2023 में भारत की अध्यक्षता के दौरान, नयी ऊर्जा और विचारों का संचार हुआ था। स्टार्ट-अप्स और इनोवैशन, ट्रेडिशनल मेडिसन, युवा सशक्तिकरण , डिजिटल इन्क्लूशन और साझा बौद्ध विरासत जैसे नए विषयों को अपने सहयोग में जोड़ा था।”

उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि इसमें सरकारोंं से परे सामान्य व्यक्ति,युवा वैज्ञानिक, विद्वान और स्टार्ट अप भी जुड़े।

श्री मोदी ने लोगों के बीच संपर्क बढाने के लिए एससीओ के अंतर्गत एक ‘सांस्कृतिक संवाद मंच’ बनाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे हम अपनी प्राचीन सभ्यताओं, कला, साहित्य और परंपराओं को वैश्विक मंच पर साझा कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने देश में विभिन्न स्तर पर किये जा रहे सुधारोंं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने हर चुनौती को अवसर में बदलने का प्रयास किया है। इससे देश में विकास के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए भी नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह सभी को भारत की विकास यात्रा से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हैं।

उन्होंने संगठित अपराध, मादक दवा तस्करी और साइबर सुरक्षा जैसी समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए चार नए केंद्र बनाए का स्वागत किया। संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओंं में भी सुधारों का आह्वान करते हुए श्री मोदी ने कहा, “वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए एससीओ सदस्य आपसी सहयोग बढ़ा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र की अस्सीवीं वर्षगांठ के अवसर पर हम एकमत होकर संयुक्त राष्ट्र सुधारों का आह्वान कर सकते हैं।”

श्री मोदी ने विकासशील देशों की आवाज को मुखर बनाने पर जोर देते हुए कहा , “ ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को पुराने फ्रेमवर्क में कैद रखना भावी पीढ़ियों के प्रति घोर अन्याय है। नई पीढ़ी के बहुरंगी सपनों को हम पुराने जमाने की ‘ब्लैक एंड व्हाइट स्क्रीन’ पर नहीं दिखा सकते। स्क्रीन बदलनी होगी”

उन्होंने इस दिशा में एससीओ के महत्व का उल्लेख किया और कहा , “ एससीओ बहुपक्षवाद और समावेशी विश्व व्यवस्था का मार्गदर्शक बन सकता है।”

उन्होंने एससीओ के अगले अध्यक्ष किर्गिज़स्तान के राष्ट्रपति जपारोव को शुभकामनाएं भी दी।

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