उत्तम आर्जव धर्म से जीवन में होता है विश्वास कायम

बीना। दस लक्षण पर्व के तृतीय दिवस पर मुनि श्री सुब्रत सागर महाराज ने इटावा दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन देते हुए कहा कि मायाचारी और छल-कपट से मित्रता तथा विश्वास दोनों नष्ट हो जाते हैं। इसलिए जैन धर्म में मायाचारी का त्याग कर उत्तम आर्जव धर्म का पालन करने की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि विश्वास के बिना जीवन, समाज और धर्म कोई भी सुचारु रूप से नहीं चल सकता। धन या ज्ञान खोकर पुनः प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन एक बार विश्वास टूटने के बाद उसे हासिल करना लगभग असंभव हो जाता है। मुनिश्री ने कहा कि जो भगवान को भी ठगने का प्रयास करता है, वह किसी का विश्वास पात्र नहीं हो सकता। उन्होंने संदेश दिया कि सरलता और सच्चाई ही जीवन को सफल बनाती है। इस अवसर पर शांतिधारा, अभिषेक और दस लक्षण विधान का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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