नयी दिल्ली, 30 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान और हरदीप सिंह पुरी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेज आर्थिक विकास की सराहना करते हुये इसका श्रेय मोदी सरकार की नीतियों को दिया है।
पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े शुक्रवार को जारी किये गये। अप्रैल-जून तिमाही के दौरान जीडीपी विकास दर बढ़कर 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गयी। इससे पहले जनवरी-मार्च 2025 में यह 7.4 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 6.5 प्रतिशत रही थी।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “लगातार मुद्रास्फीति कम रहने से वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है, जो पांच तिमाहियों का उच्चतम स्तर है।”
उन्होंने लिखा कि पिछली तिमाही की 7.4 प्रतिशत के बाद यह विकास दर भारतीय अर्थव्यवस्था के उर्ध्वमुखी ग्राफ को दिखाती है।
एक अन्य पोस्ट में जीडीपी आंकड़ों की खबरों को साझा करते हुये श्री गोयल ने लिखा कि यही भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती है। सेवा क्षेत्र जीडीपी वृद्धि का मुख्य कारक रहा। लगातार दो तिमाहियों में जीडीपी वृद्धि दर उम्मीद से बेहतर रही है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सही नीति और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम आज देश ही नहीं, दुनिया देख रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में लिये गये मजबूत फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को नयी उड़ान दी है।”
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी जीडीपी आंकड़ों के बारे में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “डेड इकोनॉमी कहने वाले अब समझ लें, भारत एक लॉन्ग लिव इकोनॉमी है। जब नेतृत्व अडिग, नीतियां सटीक और निर्णय दूरदर्शी हों, तब परिणाम इतिहास रचते हैं।”
उन्होंने इन आंकड़ों को किसानों के पसीने, वैज्ञानिकों की मेहनत और 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य का प्रदर्शन बताया और कहा कि यह क्षण किसानों के लिए विशेष गर्व का है।
श्री चौहान ने लिखा, “बढ़ती अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका अभूतपूर्व है। किसानों के परिश्रम और नवाचारों से कृषि वृद्धि दर बढ़कर 3.7 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत, विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने की ओर अग्रसर है।”
एनएसओ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गयी। यह वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में दर्ज की गयी 6.5 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है।
मौजूदा कीमतों पर, जीडीपी में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी, जो घरेलू गतिविधियों में मजबूत गति को दर्शाता है। बुनियादी कीमतों पर सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) भी अप्रैल-जून में 7.6 प्रतिशत बढ़ा। इन मजबूत आंकड़ों के पीछे सबसे बड़ी वजह सेवा क्षेत्र में रही तेज वृद्धि दर है। एनएसओ ने कहा, “मजबूत विनिर्माण और निर्माण गतिविधियों के साथ सेवा क्षेत्र में तेज वृद्धि के कारण अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 7.6 प्रतिशत की वास्तविक जीवीए वृद्धि दर्ज करने में सक्षम रही।”
कृषि और संबद्ध क्षेत्र की विकास दर पहली तिमाही में एक साल पहले के 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गयी। खनन और उत्खनन में हालांकि 3.1 प्रतिशत की तेज गिरावट रही।
द्वितीयक क्षेत्र में विनिर्माण (7.7 प्रतिशत) और निर्माण (7.6 प्रतिशत) में मजबूत वृद्धि देखी गयी। बिजली, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य यूटिलिटी सेवाओं में 0.5 प्रतिशत की सुस्त वृद्धि ने इस गति को संतुलित कर दिया।
तृतीयक यानी सेवा क्षेत्र में सबसे तेज वृद्धि देखी गयी। पहली तिमाही में इसकी विकास दर 9.3 प्रतिशत रही, जबकि एक साल पहले यह 6.8 प्रतिशत पर थी।
मांग पक्ष में, निजी अंतिम उपभोग व्यय में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो घरेलू खर्च में स्थिरता का संकेत है, हालांकि, यह पिछले वर्ष की 8.3 प्रतिशत से थोड़ा कम है।
निवेश का एक प्रमुख संकेतक सकल स्थायी पूंजी निर्माण 7.8 प्रतिशत बढ़ा, जो वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही के 6.7 प्रतिशत से अधिक है, जो पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर का संकेत देता है।
महत्वपूर्ण रूप से, सरकारी अंतिम उपभोग व्यय में तेज उछाल आया और यह 7.4 प्रतिशत बढ़ा। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसमें 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी थी।

