
नई दिल्ली, 27 अगस्त। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध एक भयावह मानवीय त्रासदी में बदल गया है। इस युद्ध में अब तक लाखों लोग हताहत हुए हैं, जिनमें सैनिक और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। यह संघर्ष न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बर्बाद कर रहा है, बल्कि इसने दुनिया को भी एक खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सैन्य हताहतों का भयावह सच
युद्ध में सैनिकों के हताहत होने के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। विभिन्न खुफिया एजेंसियों और विश्लेषकों के अनुसार, दोनों पक्षों के लाखों सैनिक मारे गए हैं या घायल हुए हैं। जहां एक ओर रूस अपने सैनिकों के नुकसान को कम करके बता रहा है, वहीं यूक्रेन भी अपने नुकसान के सटीक आंकड़े जारी करने से बच रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के संयुक्त सैन्य हताहतों की संख्या 10 लाख से भी अधिक हो सकती है, जो इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे घातक संघर्षों में से एक बनाता है।
आम नागरिकों पर कहर
यह युद्ध केवल युद्धभूमि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने आम नागरिकों के जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, युद्ध में हजारों नागरिक मारे गए हैं और अनगिनत घायल हुए हैं। कई शहरों और कस्बों पर रूस के लगातार मिसाइल और हवाई हमलों ने आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाया है। लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं और उन्हें पड़ोसी देशों में शरण लेनी पड़ी है, जिससे एक बड़ा शरणार्थी संकट पैदा हो गया है।
आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
युद्ध का प्रभाव केवल जान-माल के नुकसान तक सीमित नहीं है। इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। ऊर्जा और खाद्य कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है। इसके अलावा, युद्ध के कारण भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ा है, जिससे भविष्य में बड़े संघर्ष की आशंका भी पैदा हो गई है।
