लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण केवल परंपरा निभाने का अवसर नहीं था, बल्कि यह राष्ट्र को स्पष्ट संदेश देने का क्षण था. इस बार का भाषण तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित रहा—आंतरिक और बाहरी सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण.प्रधानमंत्री ने आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के बीच कोई भेद न करने की नीति को भारत का नया एजेंडा घोषित कर दिया है. यह वही कठोर रुख है जिसने ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों को जन्म दिया, जहां भारत ने पाकिस्तान को भारी क्षति पहुंचाकर यह साबित कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में हम किसी भी हिचकिचाहट से परे हैं. प्रधानमंत्री ने साफ किया कि भारत अब परमाणु ब्लैकमेल के युग को समाप्त मानता है—कोई भी दुस्साहस , निर्णायक उत्तर पाएगा. यह संदेश केवल पाकिस्तान या चीन के लिए नहीं, बल्कि उन सभी ताकतों के लिए है जो भारत की संप्रभुता को चुनौती देना चाहती हैं. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का आधार आत्मनिर्भरता ही होगा. ‘मेड इन इंडिया’ चिप का 2025 तक उत्पादन शुरू होना भारत की तकनीकी स्वतंत्रता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है. दाम कम, दम ज़्यादा का नारा केवल आर्थिक रणनीति नहीं बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय उत्पादों की पहचान है. उन्होंने जीएसटी सुधारों का संकेत देकर मध्यम वर्ग और आम नागरिकों के कर बोझ को हल्का करने का भरोसा जगाया. ऊर्जा क्षेत्र में 2047 तक आत्मनिर्भरता का लक्ष्य भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने के रोड मैप का अहम हिस्सा है. प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि को एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताते हुए किसानों के अधिकारों पर जोर दिया. उनका कहना कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते पाकिस्तान के प्रति भारत की नई सख्ती का प्रतीक है. साथ ही उन्होंने घुसपैठियों द्वारा जनसांख्यिकी बदलने के षड्यंत्रों के खिलाफ आगाह किया. यह राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का आह्वान है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने संघ को राष्ट्रसेवा की परंपरा का स्तंभ बताया. आपातकाल की 50 वीं बरसी पर संविधान की हत्या की याद दिलाना लोकतंत्र की रक्षा का सशक्त संदेश था. वहीं प्रयागराज का महाकुंभ भारत की एकता, आस्था और शक्ति का प्रतीक बताया गया. कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का भाषण केवल भविष्य की योजनाओं का खाका नहीं बल्कि राष्ट्रीय संकल्प का घोषणा पत्र है. सुरक्षा में आत्मविश्वास, अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता और समाज में आत्मगौरव,ये तीनों मिलकर भारत को अमृत काल में नई ऊंचाई देंगे. यह संदेश साफ है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं करेगा, बल्कि पहल करते हुए विश्व पटल पर अपनी शर्तों पर आगे बढ़ेगा. प्रधानमंत्री ने जहां बिना नाम लिए अमेरिका को परोक्ष चेतावनी दी, वहीं उन्होंने पाकिस्तान को भी साफ तौर पर बता दिया कि भारत किसी भी धमकी या दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है. दरअसल प्रधानमंत्री के पूरे भाषण का फोकस आत्मनिर्भरता की तरफ था.
