
ग्वालियर। केन्द्रीय जेल से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 16 कैदियों को रिहा किया गया। ये सभी हत्या के मामले में दोषी थे और 20 साल की सजा काट रहे थे। इनमें से अधिकतर ने 14 साल से ज्यादा समय जेल में बिताया था। अच्छे आचरण के चलते उनकी शेष सजा माफ कर दी गयी। रिहा कैदियों में कोई महिला शामिल नहीं थी जबकि एक कैदी पर झांसी में मामला दर्ज होने पर उसे वहां भेजा गया।
*अच्छे व्यवहार से मिली रिहाई*
जेल अधीक्षक विदित सरवरिया ने बताया कि 16 बंदियों का उनके अच्छे आचरण के आधार पर रिहा किया गया है। इनमें से अधिकांश ने 14 साल से अधिक की सजा पूरी कर ली थी। एक बंदी यूपी के झांसी का निवासी है। जिस पर वहां अपराध दर्ज है। इसलिये उसे ग्वालियर से सीधे झांसी जेल भेजा गया।
*अपराध से दूर रहने का संकल्प*
रिहा हुए कैदियों में से एक कल्लू भइया ने बताया कि वह धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। विवाद के दौरान दो लोगों की हत्या के मामले में उन्हें सजा मिली थी। लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल होने के कारण उन्हें दोषी ठहराया गया। उन्होंने 14 साल 4 महीने जेल में बिताए और अब खेती-किसानी कर अपराध की दुनिया से दूर रहने का संकल्प लिया है। जेल प्रशासन ने सभी रिहा कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन शुरू करने की सलाह दी।
