
शाजापुर। बारिश की लंबी खेंच का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. आसमान पर बादल जरूर छा रहे हैं, जो बिन बरसे लौट रहे हैं. बारिश के अभाव मे बोवनी कर चुके किसानों को अब फसलों की चिंता सता रही है. क्योंकि यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई, तो किसानों को दोबारा बोवनी की नौबत आ सकती है, जो किसानों के लिए आसान काम नहीं है. ऐसे में उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है. वहीं मौसम विभाग ने भी चिंता बढ़ाने वाली जानकारी दी है, जिसके अनुसार आगामी एक सप्ताह और राहत बरसने के आसार नहीं हैं.
गौरतलब है कि जिले में 29 जुलाई को कुछ देर के लिए फुहारें बरसी थी. तब से आज तक आसमान साफ है. बारिश न होने के कारण लोगों का गर्मी से बुरा हाल हो रहा है और नगरवासी आसमान ताक रहे हैं. वहीं तापमान में भी लगातार उछाल आ रहा है. रविवार को भी नगर का अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री दर्ज किया गया, तो रात का तापमान भी 23.8 डिग्री पहुुंच चुका है, जबकि गत वर्ष अब तक 28 इंच के करीब बारिश हो चुकी थी और मौसम में भी ठंडक घुली हुई थी, लेकिन इस वर्ष स्थिति बिल्कुल विपरीत है. अब तक केवल 11 इंच वर्षा ही दर्ज हुई है.
रात में भी नहीं राहत…
केवल दिन में ही नहीं बल्कि लोगों को रात में भी मुसीबत हो रही है. क्योंकि बारिश के अभाव में बढ़ती गर्मी व उमस से लोगों का बुरा हाल हो रहा है. जिसके चलते लोगों को न दिन में चैन है और न ही रात में सुकून. रात में जरूर कुछ देर के लिए ठंडी हवाएं चलती हैं. वहीं दिन में छाने वाले बादल भी केवल लोगों को तरसाकर खाली हाथ लौट रहे हैं.
बारिश की खेंच से सूखने लगी फसलें…
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीआर अंबावतिया ने बताया कि जहां बल्डे की जमीन है, वहां फसलें सूखने लगी हैं, जिसे अब पानी की बहुत आवश्यकता है और पानी के अभाव में फूल भी मुरझाने लगे है. हालांकि जहां नमी वाली जमीन है, वहां फसलें फिलहाल टिकी हुई हैं, लेकिन उन्हें भी अब दो से चार दिन में पानी की जरूरत पडऩे वाली है, जिसके अभाव में उन फसलों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा.
फसलों में पीला मोजेक-इल्ली के प्रकोप का डर
बारिश की लंबी खेंच से फसलों पर भी संकट के बादल छाने लगे हैं. बढ़ते तापमान और पानी की कमी के चलते सोयाबीन की फसल पर पीला मोजेक और इल्ली का प्रकोप बढऩे की आशंका है. कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यदि यही हालात रहे, तो फसलें प्रभावित हो सकती हैं. कई किसानों की फसलें अब बढऩे की स्थिति में हैं, जिन्हें अब पानी की आवश्यकता है. ऐसी स्थिति में कृषि वैज्ञानिक भी किसानों की कोई मदद नहीं कर पा रहे हैं. क्योंकि बारिश हो तो फसलों को जीवनदान मिले, लेकिन अब तक बारिश का इंतजार खत्म नहीं हुआ है. जबकि कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं, लेकिन यहां गर्मी से भी राहत नहीं मिल पा रही है.
बांध का जलस्तर भी तेजी से गिर रहा…
बारिश की लंबी खेंच से एक तरफ फसलों की स्थिति खराब हो रही है, तो दूसरी तरफ शहरवासियों के लिए पेयजल संकट की ओर इशारा भी कर रही है. क्योंकि बारिश नहीं होने के कारण पेयजल का प्रमुख स्रोत चीलर बांध खाली ही पड़ा है. बांध में जगह-जगह टीले दिखाई दे रहे हैं. पानी की आवक नहीं होने के कारण डेम का जलस्तर लगातार तेजी से गिर रहा है. यदि आगे भी ऐसी ही स्थिति रही, तो पेयजल संकट की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता.
