
उज्जैन। भादौ मास में सोमवार को महाकाल की पांचवीं सवारी निकली। सवारी में भगवान महाकाल ने पांच रूपों में दिव्य दर्शन देकर लाखों श्रद्धालुओं को अभिभूत किया। सवारी में ओरछा के राजाराम लोक, बगलामुखी और मैहर की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। मप्र पर्यटन विभाग ने ये झांकियां निकाली। इन्हें आगे फूलों से सजाया गया था।
दोपहर में करीब साढ़े 3 बजे मंदिर के सभामंडप में भगवान महाकाल के चांदी की पालकी में निकलने वाले श्री चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का शासकीय पुजारी घनश्याम शर्मा ने पूजन किया। इसके बाद पुजारियों ने भगवान को पालकी में विराजित किया और कहारों ने पालकी उठाई। मुख्य प्रवेश द्वार पर पुलिस के जवानों ने राजाधिराज महाकाल को सलामी देकर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। सवारी में आगे झांझ-डमरू पर थिरकते भक्त और भजन गाती मंडलियां निकली। फिर घुड़सवार दल, पुलिस का बैंड पैदल धुन बजाते हुए निकला। इस सवारी में श्रावण मास जैसी भीड़ नहीं थी। लेकिन श्रद्धालुओं में काफी उत्साह था। मार्ग हमेशा की तरह जयकारों से गूंज उठा।शिप्रा के रामघाट पर सवारी में चार जनजातीय एवं लोक नृत्य कलाकारों के दल भी शामिल हुए जिन्होंने जोरदार प्रस्तुति दी। सवारी में पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ के रथ पर शिव तांडव, नंदी के रथ पर उमा-महेश और डोल के रथ पर होल्कर स्टेट का स्वरूप के दर्शन हुए।
सवारी में तिरंगे झंडे भी लहराए, लाइव प्रसारण किया गया
15 अगस्त के ठीक पहले निकली इस सवारी में पुलिस के सशस्त्र जवान तिरंगे झंडे लगाकर पैदल मार्च पास्ट करते हुए नजर आए। सवारी को लाइव दिखाने के लिए चलित रथ, फ्रीगंज, नानाखेड़ा आदि जगहों पर स्क्रीन व मंदिर के फेसबुक पेज पर लाइव प्रसारण किया गया।
छठी सवारी राजसी होगी जो 18 अगस्त को धूमधाम से निकलेगी
महाकाल की अगली सवारी अंतिम यानी राजसी होगी जो 18 अगस्त सोमवार को निकलेगी। यह सवारी बड़े रूट से होकर जाएगी। श्रावण-भादो मास के क्रम में यह छठी सवारी होगी। इस सवारी का नगर भर में मंचों से स्वागत भी किया जाता है।
