ईपीएस-95 पेंशनभोगियों की मांगों पर कई सांसदों ने की बुधवार को संसद भवन परिसर में धरने की घोषणा

नयी दिल्ली, 05 अगस्त (वार्ता) विभिन्न राज्यों से निर्वाचित पक्ष-विपक्ष के 20 से अधिक संसद सदस्यों ने ईपीएस-95 योजना के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ा कर 7,500 रुपये प्रति माह करने, महंगाई क्षतिपूर्ति और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा जैसी प्रमुख मांगों को लेकर राजधानी में दो दिन से धरना दे रहे निजी क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का समर्थन किया है और कहा है कि वे इसके लिए बुधवार को संसद भवन परिसर में धरना-प्रदर्शन करेंगे।

यहां जंतर-मंतर पर इन पेंशनभोगियों के चल रहे राष्ट्रव्यापी घरना-प्रदर्शन देशभर से जुटे हजारों पेंशनभोगियों के बीच विभिन्न दलों के 26 सांसदों ने आकर अपना समर्थन जताया। आयोजकों की ओर से मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इन सांसदों में राज्य सभा सदस्य एवं भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ मेधा कुलकर्णी, पिंपरी चिंचवड़ सीट से श्रीरंग अप्पा बारणे, सीकर सीट से अमरा राम, बाराबंकी सीट से तनुज पुनिया, कोल्हापुर सीट से छत्रपति शाहू महाराज, जालना सीट से कल्याण काले, धाराशिव सीट से ओम राजे निंबालकर, ठाणे सीट से नरेश म्हस्के, चंद्रपुर सीट से प्रतिभा ताई धानोरकर, धुले सीट से शोभा ताई बच्छाव, हिंगोली सीट से बंडू भाऊ जाधव, छत्रपति संभाजी नगर सीट से सांदीपन भूमरे, लातूर सीट से शिवाजी राव कालगे, नाशिक सीट से राजा भाऊ वाझे, दिंडोरी सीट से भगरे गुरुजी, गडचिरोली सीट से नामदेवराव किरसन, भंडारा सीट से प्रशांत पडोले, नांदेड सीट से रवीन्द्र चव्हाण तथा गुजरात की बनासकांठा सीट सांसद जेनिबेन ठाकोर शामिल थे।

डॉ मेधा कुलकर्णी ने कहा, “ मैं सभी आंदोलनकारियों को यह भरोसा दिलाती हूं कि सरकार आपके साथ है और आपकी विरोधी नहीं है। मैंने इस मुद्दे को लेकर संबंधित मंत्री से बातचीत की है और मुझे पूरा विश्वास है कि इसका समाधान जल्द ही निकलेगा।” विज्ञप्ति के अनुसार घरने पर आये सांसदों ने घोषणा की है कि वे कल (बुधवार को) संसद भवन परिसर में हाथों में तख्तियां लेकर धरना देंगे और ईपीएस-95 पेंशनभोगियों की मांगों को उठायेंगे।

ईपीएस95 के पेंशनभोगियों की संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राऊत, राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत, और राष्ट्रीय मुख्य समन्वयक रमाकांत नरगुंड ने कहा कि यदि सरकार ने 78 लाख पेंशनभोगियों के हित में जल्द फैसला नहीं लिया तो देशभर में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन, अनशन, रास्ता रोको और जेल भरो जैसे आक्रामक आंदोलन शुरू किये जायेंगे।

धरने में महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, राजस्थान, मणिपुर, असम सहित विभिन्न राज्यों के पेंशनर संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया और पेंशन बढ़ोतरी न होने पर गहरा रोष जताया।

 

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