श्रीनगर, 27 जुलाई (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कश्मीर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों से केंद्र शासित प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने में सक्रिय रूप से शामिल होने का आह्वान किया तथा उनसे क्षेत्र की शांति, प्रगति तथा शैक्षणिक विकास में योगदान देने के लिए अपनी विशेषज्ञता और पेशेवर नेटवर्क का लाभ उठाने का आग्रह किया।
श्री सिन्हा कश्मीर विश्वविद्यालय में मेगा एलुमनाई मीट-2025 को संबोधित कर रहे थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, विक्रम नाथ, पीएस नरसिम्हा, पंकज मिथल और राजेश बिंदल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे, कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलोफर खान और कश्मीर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में पूर्व छात्रों को बधाई दी और प्रतिभाशाली दिमागों को पोषित करने के लिए कश्मीर विश्वविद्यालय की सराहना की, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जबरदस्त उपलब्धियां हासिल की हैं और दुनिया भर में सामाजिक परिवर्तन ला रहे हैं।
उन्होंने कहा, “पूर्व छात्र केवल पूर्व छात्रों का एक नेटवर्क नहीं है, बल्कि मानवीय क्षमता का एक नेटवर्क है जो राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित है। आज, हम उन पूर्व छात्रों को अपने बीच पाकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं जिन्होंने वास्तव में राष्ट्र को गौरवान्वित किया है। वे कश्मीर विश्वविद्यालय की 77 वर्षों की विरासत के जीवंत प्रमाण हैं।”
उपराज्यपाल ने पूर्व छात्रों से जम्मू-कश्मीर के उच्च शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की शांति और प्रगति में योगदान देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता और नेटवर्क का उपयोग करने के लिए आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों को उनकी इंटर्नशिप और करियर की संभावनाओं में युवा छात्रों को आवश्यक सहायता और सहयोग प्रदान करना चाहिए, उन्हें प्रेरित, मार्गदर्शन और सशक्त बनाना चाहिए तथा नयी पीढ़ी के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “निःस्वार्थ भाव से साझा करने की परंपरा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। मेरा मानना है कि वैश्वीकरण के इस दौर में किसी भी संस्थान और क्षेत्र के विकास के लिए पूर्व छात्रों का जुड़ाव सबसे प्रभावी रणनीति है। कश्मीर विश्वविद्यालय को पूर्व छात्रों के लिए एक संस्थागत तंत्र बनाना चाहिए जो उन्हें विश्वविद्यालय को कुछ वापस देने का अवसर प्रदान करे।”
उपराज्यपाल ने भारत के गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अक्षरशः लागू करने पर ज़ोर दिया। जम्मू कश्मीर ने इस दिशा में अभूतपूर्व कार्य किया है। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन योर ओन डिग्री जैसे हमारे अभिनव कार्यक्रम देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।
उन्होंने हाल ही में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) में प्रतिष्ठित ए पलस ग्रेड प्राप्त करने और देश के शीर्ष संस्थानों में अपना स्थान सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर विश्वविद्यालय को बधाई दी।
